मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंAPPENDIX A
उपसंहार (अक्षर) क ।
इस नाटक मे आदि अन्त तथा अङ्कों के विश्रामस्थल में रंगशाला मे ये गीत गाने चाहिए । यथा—
सब के पूर्व्व मङ्गलाचरण में ।
( ध्रुवपद चौताला )
५ जय जय जगदीस राम, श्याम धाम पूर्ण काम, आनन्द घन ब्रह्म विष्णु, सत् चित सुखकारी । कस रावनादि काल, सतत प्रनत भद्रपाल, सोभित गल मुकुमाल, दीनतापहारी ॥ प्रेम सरन पापहरन, असरन जन सरन चरन, सुखहि करन दुखहि दरन, वृन्दावनचारी । रमावास जगनिवास, राम रमन
१० समनत्रास, बिनवत हरिचन्द दास, जय जय गिरधारी ॥ १ ॥
( प्रस्तावना के अन्त मे प्रथम अङ्क के आरम्भ मे )
( चाल लखनऊ की ठुमरी “शाहजादे आलम तेरे लिये” इस चाल की )
जिनके हितकारक पण्डित हैं तिन कों कहा सत्रुन को डर है ।
१५ समुझैं जग में सब नीतिन्ह जो तिन्हें दुर्ग बिदेश मनो घर है ।
जिन मित्रता राखी है लायक सो तिनकों तिनकाहू महासर है ।
जिनकी परतिज्ञा टरै न कबौ तिनकी जय ही सब ही थर है॥२॥
( प्रथम अङ्क की समाप्ति और दूसरे अङ्क के प्रारम्भ मे )