मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१५६ मुद्राराक्षस-
यह प्रख्यात हुआ। मार्टिन साहब ने जरासन्ध ही के विषय मे एक अपूर्व कथा लिखी है। वह कहते हैं कि जरासन्ध दो पहाडियों पर दो पैर रख कर द्वारका मे जब स्त्रिया नहाती थी तो ऊचा होकर उन को घूरता था। इसी अपराध पर ५ श्रीकृष्ण ने उस को मरवा डाला ! ! ! मगध शब्द मग से बना है। कहते हैं कि "श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब ने शाकद्वीप से मग जाति के ब्राह्मणों को अनु ष्ठान करने को बुलाया था और वे जिस देश मे बसे उस की मगध सज्ञा हुई।" जिन अगरेज विद्वानों ने 'मगध देश' १० शब्द को मद्ध (मध्यदेश) का अपभ्रंश माना है उन्ह शुद्ध भ्रम हो गया है जैसा कि मेजर विल्फर्ड पालीबोत्रा को राजमहल के पास गङ्गा और कोसी के सङ्गम पर बतलाते और पटने का शुद्ध नाम पद्मावती कहते हैं। यों तो पाली इस नाम के कई शहर हिन्दुस्तान मे प्रसिद्ध हैं किन्तु पालीबोत्रा पाट १५ लिपुत्र ही है। सोन के किनारे मावलीपुर एक स्थान है जिस का शुद्ध नाम महाबलीपुर है। महाबली नन्द का नामान्तर भी है, इसी से और वहा प्राचीन चिन्ह मिलने से कोई कोई शंका करते हैं, कि बलीपुर वा बलीपुत्र का पालीबोत्रा अप- भ्रंश है, किन्तु यह भी भ्रम ही है। राजाओ के नाम से अनेक २० ग्राम बसते हैं इस मे कोई हानि नही, किन्तु इन लोगों की राजधानी पाटलिपुत्र ही थी। कुछ विद्वानों का मत है कि मग लोग मिश्र से आए और यहा आकर siris और Osiris नामक देव और देवी की पूजा प्रचलित की। यह दोनों शब्द ईश और ईश्वरी के अप २५ भ्रंश बोध होते हैं। किसी पुराण मे "महाराज दशरथ ने शाकद्वीपियों को बुलाया" यह लिखा है। इस देश मे पहले कोल और चेरु (चोल) लोग बहुत रहते थे। शूनक और