मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपूर्व्वकथा । २३
जाकर देखा तो पर्वतक को बिछौने पर मरा हुआ पाया । इस भयानक दृश्य के देखते ही मुग्ध मलयकेतु के प्राण सूख गये और भागुरायण का सलाह से उस रात को छिप कर वहा से भाग कर अपने राज्य की ओर चला गया । इधर चाणक्य के सिखाये भद्रभट इत्यादि चन्द्रगुप्त के कई बड़े २ अधिकारी प्रगट में राजद्रोही बन कर मलयकेतु और भागुरायण के साथ ही भाग गये । ५
राक्षस ने मलयकेतु से पर्वतक के मारे जाने का समाचार सुन कर अत्यन्त सोच किया और बड़े आग्रह और सावधानी से चन्द्रगुप्त और चाणक्य के अनिष्टसाधन मे प्रवृत्त हुआ । १०
चाणक्य ने कुसुमपुर मे दूसरे दिन यह प्रसिद्ध कर दिया कि पर्वतक और चन्द्रगुप्त दोनों समान बन्धु थे, इस से राक्षस ने विषकन्या भेज कर पर्वतक को मार डाला और नगर के लोगों के चित्त पर, जिन को कि यह सब गुप्त अनुसन्धि न मालूम थी, इस बात का निश्चय भी करा दिया । १५
इस के पीछे चाणक्य और राक्षस के परस्पर नीति की जो चोटें चली हैं, उसी का इस नाटक में वर्णन है ।
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