मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंपूर्व्वकथा
पूर्व्व काल में भारतवर्ष मे मगधराज्य एक बड़ा भारी जनस्थान था। जरासन्ध आदि अनेक प्रसिद्ध पुरुवंशी राजा यहा बड़े प्रसिद्ध हुए हैं। इस देश की राजधानी पाटलिपुत्र अथवा पुष्पपुर थी। इन लोगों ने अपना प्रताप और शौर्य्य इतना बढ़ाया था कि आज तक इनका नाम भूमण्डल पर प्रसिद्ध है। किन्तु कालचक्र बड़ा प्रबल है कि किसी को भी एक अवस्था मे रहने नही देता। अन्त में नन्दवंश * ने पौरवों को निकाल कर वहा अपनी जयपताका उड़ाई। वरच सारे भारतवर्ष मे अपना प्रबल प्रताप विस्तारित कर दिया।
इतिहासग्रन्थों मे लिखित है कि एक सौ अड़तीस बरस नन्दवंश ने मगध देश का राज्य किया। इसी वंश में महानन्द का जन्म हुआ। यह बड़ा प्रसिद्ध और अत्यन्त प्रतापशाली राजा हुआ। जब जगद्विजयी सिकन्दर (अलक्षेन्द्र) ने भारतवर्ष पर चढ़ाई किया था तब असंख्य हाथी, बीस हजार सवार और दो लाख पैदल लेकर महानन्द ने उस के विरुद्ध प्रयाण किया था ×। सिद्धान्त यह कि भारतवर्ष में उस समय महानन्द सा प्रतापी और कोई राजा न था।
महानन्द के दो मन्त्री थे। मुख्य का नाम शकटार और दूसरे
* यह वंश सम्मिलित क्षत्रियों का वंश था। ये लोग शुद्ध क्षत्री नहीं थे।
× सिकन्दर के कान्यकुब्ज से आगे न बढने से महानन्द से उस से मुक़ाबिल नहीं हुआ।