भारतकोश
मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा

स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)

DevanagariHindipublished173 पृष्ठ

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६० मुद्राराक्षस—

समय ही चाणक्य के जी मे अनेक सन्देह उत्पन्न कराया। हा फिर?
विराधगुप्त।—फिर उस दुष्ट चाणक्य ने कुछ सहेज दिया कि आज आधी रात को अब
५ उसी समय पर्व्वतेश्वर के भाई वैरोचक को एक आसन पर बिठा कर पृथ्वी का कर दिया।
राक्षस।—क्यों पर्व्वतेश्वर के भाई वैरोचक मिला, यह पहिले ही उसने सुना दिया?
१० विराधगुप्त।—हा, तो इससे क्या हुआ?
राक्षस।—(आप ही आप) निश्चय यह ब्राह्मण इस ने उस सीधे तपस्वी से इधर-उधर बना कर पर्व्वतेश्वर के मारने के अपयश का यह उपाय सोचा। (प्रकाश) अच्छा कहो—
१५ विराधगुप्त।—तब यह तो उसने पहले ही प्र था कि आज रात को गृह प्रवेश होगा, पि चक को अभिषेक कराया और बड़े बड़े मोतियों का उसको कवच पहिराया औ से जड़ा सुन्दर मुकुट उसके सिर पर ब
२० मे अनेक सुगन्ध के फूलों की माला पहिर एक ऐसे बड़े राजा की भांति हो गया कि उसे सर्वदा देखा है वे भी न पहिचान दुष्ट चाणक्य की आज्ञा से लोगों ने चन्द्र लेखा नाम की हथिनी पर बिठा कर ब
२५ साथ करके बड़ी शीघ्रता से नन्द मन्दिर कराया। जब वैरोचक मन्दिर मे घुसने का भेजा दारुवर्म्म बढ़ई उसको चन्द्रगुप्त