मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें६८ मुद्राराक्षस—
राक्षस।—(देख कर बड़े शोच से आप ही आप) हाय २ इस को तो जब मै नगर से निकला था तो ब्राह्मणी ने मेरे स्मरणार्थ ले लिया था, वह इस के हाथ कैसे लगी? (प्रकाश) सिद्धार्थक ! तुम ने यह कैसे पाई? ५ सिद्धार्थक।—महाराज ! कुसुमपुर मे जो चन्दनदास जौहरी हे उन के द्वार पर पड़ी पाई। राक्षस।—तो ठीक है। सिद्धार्थक।—महाराज ! ठीक क्या है? राक्षस।—यही कि ऐसे धनिको के घर बिना यह वस्तु और १० कहा मिले? शकटदास।—मित्र ! यह मन्त्री जी के नाम की मोहर है, इस से तुम इस को मन्त्री को दे दो, तो इस के बदले तुम्हे बहुत पुरस्कार मिलेगा। सिद्धार्थक।—महाराज ! मेरे ऐसे भाग्य कहा कि आप इसे लें। १५ (मोहर देता है) राक्षस।—मित्र शकटदास ! इसी मुद्रा से सब काम किया करो। शकटदास।—जो आज्ञा। सिद्धार्थक।—महाराज ! मै कुछ बिनती करू ? २० राक्षस।—हा हा ! अवश्य करो। सिद्धार्थक।—यह तो आप जानते ही है कि उस दुष्ट चाणक्य की बुराई कर के फिर मै पटने मे घुस नही सकता, इससे कुछ दिन आप ही के चरणों की सेवा किया चाहताहू। राक्षस।—बहुत अच्छी बात है, हम लोग तो ऐसा चाहते ही थे, अच्छा है, यही रहो। २५ सिद्धार्थक।—(हाथ जोड कर) बडी कृपा हुई। राक्षस।—मित्र शकटदास ! लेजाओ, इस को उतारो और सब