मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) द्वारा
स्रोत: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें१०० मुद्राराक्षस-
राक्षस। —कोई है? [ प्रियम्बदक आता है ]
प्रियम्बदक। —आज्ञा ! राक्षस। —देख तो द्वार पर कौन भिक्षुक खड़ा है? ५ प्रियम्बदक। —जो आज्ञा [ बाहर जा कर फिर आता है अमात्य ! एक क्षपणक भिक्षुक। राक्षस। —( असगुन जान कर आप ही आप ) पहिले ही क्षपणक का दर्शन हुआ। प्रियम्बदक। —जीवसिद्धि नाम। १० राक्षस। —अच्छा, बोलाकर ले आ। प्रियम्बदक। —जो आज्ञा ( जाता है ) ( क्षपणक आता है ) क्षपण। — पहिले कटु परिणाम मधु औषध सम उपदेस। मोह व्याधि के वैद्य गुरु, तिनको सुनहु अदेस ॥ [ पास जाकर ] उपासक ! धर्म लाभ हो ! १५ राक्षस — जोतिषी जी, बताओ, अब हम लोग प्रस्थान किस दिन करें ? क्षपणक। —( कुछ सोच कर ) उपासक ! मुहूर्त्त तो देखा। आज भद्रा तो पहर पहिले ही छूट गई है और तिथि भी सम्पूर्णचन्द्रा पौर्णमासी है और आप लोगों को उत्तर से २० दक्षिण जाना है और नक्षत्र भी दक्षिण ही है। अथ ये सूरहि चन्द के, उदये गमन प्रशस्त ।* पाइ लगन बुध केतु तौ, उदयो हू भो अस्त ॥
* भद्रा छूट गई अर्थात कल्याण को तो आप न जब चन्द्रगुप्त का पक्ष छोड़ा तभी छोड़ा और संपूर्ण चन्द्रा पौर्णमासी है अर्थात चन्द्रगुप्त का प्रताप पूर्ण व्याप्त है। उत्तर नाम प्राधान्य पक्ष छोड़ कर दक्षिण अर्थात् यम की दिशा को जाना है। नक्षत्र दक्षिण है अर्थात् आपका बाम ( विरुद्ध पक्ष ) नक्षत्र और आप का दक्षिण पक्ष [ मलयकेतु ] नक्षत्र [ बिना छत्र के ] है। अथए इत्यादि, तुम जो सूर हो उसकी