भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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मुहूर्त्तचिन्तामणि भाषा-टीका सहित ❖ :०: ❖ शुभाशुभप्रकरण मंगलाचरण गौरीश्रवःकेतकपत्रभङ्गमाकृष्य हस्तेन ददन्मुखाग्रे । विघ्नं मुहूर्त्तकलितद्वितीयदन्तप्ररोहो हरतु द्विपास्यः ॥ १ ॥ अन्वयः—गौरीश्रवःकेतकपत्रभंगं हस्तेन आकृष्य मुखाग्रे ददत् (अतएव) मुहूर्त्ता कलितद्वितीयदन्तप्ररोहो द्विपास्यः (अस्माकं) विघ्नं हरतु ॥ १ ॥ श्रीपार्वतीजी के कान में स्थित केतकी के फूल के दल को सूँड़ से लेकर ओष्ठ पर धरते समय मुहूर्त्तभर दूसरे दाँत के सदृश करने वाले श्रीगणेशजी हमारे विघ्न को हरें ॥ १ ॥ ग्रन्थ रचने का प्रयोजन क्रियाकलापप्रतिपत्तिहेतुं संक्षिप्तसारार्थविलासगर्भम् । अनन्तदैवज्ञसुतः स रामो मुहूर्त्तचिन्तामणिमातनोति ॥ २ ॥ अन्वयः—अनन्तदैवज्ञसुतः स रामः क्रियाकलापप्रतिपत्तिहेतुं संक्षिप्तसारार्थविलासगर्भ- मुहूर्त्तचिन्तामणि आतनोति ॥ २ ॥ अनन्त दैवज्ञ के पुत्र राम मुहूर्त्तचिन्तामणि नाम ग्रन्थ की रचना करते हैं । यह ग्रन्थ जातकर्म आदि अनेक कर्मों के करने वा न करने योग्य शुभाशुभ मुहूर्त्त के जानने का कारण है और इसमें थोड़े शब्दों में मुख्य अर्थ प्रकट