मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०० मुहूर्तचिन्तामणि अन्वयः—शुभशीलयुक्ता भार्या त्रिवर्गकरणं भवति, तस्याः शीलं लग्नवशेन शुभं भवति, तस्मात् विवाहसमयः परिचिन्त्यते, हि (यस्मात्) सुतशीलधर्माः तन्निधनतां उपगताः ॥ १ ॥ सुशीला स्त्री धर्म, अर्थ और काम की वृद्धि करती है, और स्त्री की सुशीलता विवाहकालिक लग्न के अधीन है, अर्थात् शास्त्रोक्त शुभ मुहूर्त्त में विवाह होता है तो स्त्री का स्वभाव और आचरण अच्छे होते हैं। और यदि अशुभ मुहूर्त्त में विवाह हुआ तो स्वभाव आदि अच्छे नहीं होते। इसलिए विवाह का मुहूर्त्त अच्छी तरह विचारना चाहिए। क्योंकि सुशीलता, पुत्र- प्राप्ति और धर्म, ये सब विवाहकाल के मुहूर्त्त के अधीन हैं ॥ १ ॥ विवाह प्रश्नविधि आदौ संपूज्य रत्नादिभिरथ गणकं वेदयोत्स्वस्थचित्तं कन्योद्वाहं दिगीशानलहयविशिखे प्रश्नलग्नाद्यदोन्दुः । दृष्टो जीवेन सद्यः परिणयनकरो गोतुलाकर्कटाख्यं वा स्यात्प्रश्नस्य लग्नं शुभखचरयुतालोकितं तद्विदध्यात् ॥ २ ॥ अन्वयः—आदौ रत्नादिभिः स्वस्थचित्त गणकं सम्पूज्य अथ कन्योद्वाहं वेदयेत् । यदि इन्दुः प्रश्नलग्नात् दिगीशानलहयविशिखे (स्थितः) जीवेन दृष्टः तदा सद्यः परिणयनकरः स्यात्, वा गोतुलाकर्कटाख्यं प्रश्नस्य लग्नं शुभखचरयुतालोकितं यदि स्यात् तदा तद् विदध्यात् ॥ २ ॥ मणि, सुवर्ण, चाँदी, वस्त्र, फल, फूल आदि से ज्योतिषी पण्डित की पूजा करके प्रश्नकर्ता उससे कहे कि कन्या का यह नाम है और वर का यह नाम है, इन दोनों का विवाह योग्य है या नहीं। यदि प्रश्नकालिक लग्न से दशवें, गेरहवें, तीसरे, सातवें वा पाँचवें स्थान में चन्द्रमा स्थित होकर बृहस्पति से दृष्ट हो तो शीघ्र ही विवाह होता है, अथवा वृष, तुला वा कर्क प्रश्नकालिक लग्न हो और शुभग्रहों से युक्त वा दृष्ट हो तो भी शीघ्र विवाह होता है ॥ २ ॥ विवाहकारक अन्य योग विषमभांशगतौ शशिभार्गवौ तनुगृहं बलिनौ यदि पश्यतः । रचयतो वरलाभमिमौ यदा युगलभांशगतौ युवतिप्रदौ ॥ ३ ॥ अन्वयः—यदि बलिनौ शशिभार्गवौ विषमभांशगतौ तनुगृहं पश्यतः (तदा) वरलाभं