मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाहप्रकरण १०१ रचयतः । यदा इमौ [बलिनौ शशिभार्गवौ] युगलभांशगतौ (तनुगृहं पश्यतः) तदा युवतिप्रदौ (स्तः) ॥ ३ ॥ प्रश्नकाल में यदि विषमराशि में या विषमराशि के नवांश में स्थित चन्द्रमा वा शुक्र बली होकर लग्न को देखते हों तो कन्या को वर का लाभ कराते हैं, और यदि समराशि में या समराशि के नवांश में स्थित शुक्र वा चन्द्रमा बली होकर लग्न को देखते हों तो वर को स्त्री का लाभ कराते हैं ॥ ३ ॥ वैधव्ययोग षष्ठाष्टस्थः प्रश्नलग्नाद्यदीन्दुल्लग्ने क्रूरः सप्तमे वा कुजः स्यात् । मूर्त्ताविन्दुः सप्तमे तस्य भौमो रण्डा सा स्यादष्टसंवत्सरेण ॥ ४ ॥ अन्वयः—यदि इन्दुः प्रश्नलग्नात् षष्ठाष्टस्थः वा लग्ने क्रूरः तस्य सप्तमे कुजः, वा मूर्त्तौ इन्दुः तस्य सप्तमे भौमः तदा सा कन्या अष्टसंवत्सरेण रण्डा स्यात् ॥ ४ ॥ प्रश्नकालिक लग्न से छठे वा आठवें स्थान में यदि चन्द्रमा स्थित हो तो विवाह से आठवें वर्ष में कन्या विधवा हो जाती है, और यदि प्रश्नकालिक लग्न में क्रूरग्रह स्थित हों और उससे सातवें स्थान में मंगल हो तो भी विवाह से आठवें वर्ष में कन्या विधवा होती है, अथवा प्रश्नकालिक लग्न में चन्द्रमा हो और उसके सातवें स्थान में मंगल हो तो भी विवाह से आठवें वर्ष में कन्या विधवा होती है ॥ ४ ॥ कुलटा वा मृतवत्सायोग प्रश्नतनोर्यदि पापनभोगः पञ्चमगो रिपुदृष्टशरीरः । नीचगतश्च तदा खलु कन्या सा कुलटा त्वथवा मृतवत्सा ॥ ५ ॥ अन्वयः—यदि पापनभोगः प्रश्नतनोः पञ्चमगः रिपुदृष्टशरीरः (सन्) नीचगतः, तदा सा कन्या कुलटा अथवा मृतवत्सा (स्यात्) ॥ ५ ॥ प्रश्नकालिक लग्न से पाँचवें स्थान में पापग्रह स्थित हो, और वह अपने शत्रु से देखा जाता हो और अपने नीच स्थान में हो तो कन्या कुलटा अथवा मृतवत्सा (जिसकी सन्तान न जिये) होती है ॥ ५ ॥ विवाहभङ्गयोग यदि भवति सितातिरिक्तपक्षे तनुगृहतः समराशिगः शशाङ्कः । अशुभखचरवीक्षितोऽरिरन्ध्रे भवति विवाहविनाशकारकोऽयम् ॥ ६ ॥