मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०४ मुहूर्तचिन्तामणि विवाहकाल में ग्रहशुद्धि गुरुशुद्धिवशेन कन्यकानां समवर्षेषु षडब्दकोपरिष्टात् । रविशुद्धिवशाच्छुभो वराणामुभयोश्चन्द्रविशुद्धितो विवाहः ॥ १२ ॥ अन्वयः—कन्यकानां षडब्दकोपरिष्टात्, समवर्षेषु गुरुशुद्धिवशेन, तथा वराणां रविशुद्धिवशात्, तथा उभयोः चन्द्रविशुद्धितः विवाहः (शुभः) स्यात् ॥ १२ ॥ गुरुशुद्धिवश से अर्थात् कन्या की जन्मराशि से नवें, पाँचवें, दूसरे, सातवें वा गेरहवें स्थान में बृहस्पति के रहते, छः वर्ष से ऊपर समवर्ष में अर्थात् आठवें या दशवें वर्ष में कन्याओं का, और सूर्यशुद्धिवश से अर्थात् वर की जन्मराशि से तीसरे, छठे, दशवें वा गेरहवें स्थान में सूर्य के रहते, विषमवर्ष में अर्थात् नवें, गेरहवें, तेरहवें इत्यादि वर्षों में वर का, और चन्द्रविशुद्धिवश से अर्थात् वर और कन्या की जन्मराशि से पहिले चौथे, आठवें, बारहवें स्थान को छोड़ अन्य स्थानों में चन्द्रमा के रहते वर और कन्या का विवाह शुभ होता है ॥ १२ ॥ विवाह के महीने मिथुनकुम्भमृगालिवृषाजगे मिथुनगेऽपि रवौ त्रिलवे शुचेः । अलिमृगाजगते करपीडनं भवति कार्त्तिकपौषमधुष्वपि ॥ १३ ॥ अन्वयः—मिथुनकुम्भमृगालिवृषाजगे रवौ (तथा) मिथुनगे रवौ (सति) शुचेः त्रिलवेऽपि (तथा) अलिमृगाजगते रवौ (सति) कार्त्तिकपौषमधुषु अपि करपीडनं (शुभं) भवति ॥ १३ ॥ मिथुन, कुम्भ, मकर, वृश्चिक, वृष और मेष राशि में सूर्य के रहते विवाह शुभ होता है। परन्तु मिथुन राशि में आषाढ़ के तीसरे भाग अर्थात् आषाढ़ शुक्ल दशमी तक, वृश्चिक राशि में कार्त्तिक में भी, मकर राशि में पौष में भी और मेष राशि में सूर्य के रहते चैत्र में भी विवाह होता है ॥ १३ ॥ सन्तानभेद से जन्ममासादि अशुभ व शुभ विवाह आद्यगर्भसुतकन्ययोर्द्वयोर्जन्ममासभतिथौ करग्रहः । नोचितोऽथ विबुधैः प्रशस्यते चेद्द्वितीयजनुषोः सुतप्रदः ॥ १४ ॥ अन्वयः—जन्ममासभतिथौ आद्यगर्भसुतकन्ययोः द्वयोः करग्रहः न उचितः। चेत् द्वितीयजनुषोः सुतकन्ययोः (करग्रहः) सुतप्रदः विबुधैः प्रशस्यते ॥ १४ ॥ जन्ममास, जन्मनक्षत्र, जन्मतिथि और जन्मलग्न में प्रथम उत्पन्न पुत्र वा