भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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विवाहप्रकरण १०५ कन्या का विवाह उचित नहीं है । उसके बाद उत्पन्न पुत्र वा कन्या का विवाह पुत्र का देनेवाला और पण्डितों से प्रशंसित भी है ॥ १४ ॥ ज्येष्ठमास में विशेष ज्येष्ठद्वन्द्वं मध्यमं संप्रदिष्टं त्रिज्येष्ठं चेन्नैव युक्तं कदापि । केचित्सूर्यं वह्निगं प्रोह्य चाहुर्नैवान्योन्यं ज्येष्ठयोः स्याद्विवाहः ॥ १५ ॥ अन्वयः—ज्येष्ठद्वन्द्वं मध्यमं संप्रदिष्टम्, त्रिज्येष्ठं चेत्, (तदा) कदापि नैव युक्तं स्यात्, केचित् (आचार्याः) वह्निगं सूर्यं प्रोह्य च विवाहं आहुः । किन्तु अन्योन्यं ज्येष्ठयोः (कन्यावरयोः) विवाहः नैव (शुभः) स्यात् ॥ १५ ॥ विवाह में ज्येष्ठ महीना और ज्येष्ठ वर अथवा ज्येष्ठ महीना और ज्येष्ठ कन्या, ये दो ज्येष्ठ मध्यम कहे गये हैं, अर्थात् शुभ वा अशुभ नहीं हैं ! और ज्येष्ठ कन्या, ज्येष्ठ वर और ज्येष्ठ महीना, ये तीन ज्येष्ठ तो किसी तरह से भी श्रेष्ठ नहीं हैं। कोई आचार्य कहते हैं कि कृत्तिका नक्षत्र में स्थित सूर्य को छोड़कर ज्येष्ठ मास में ज्येष्ठ वर वा ज्येष्ठ कन्या का विवाह उचित नहीं है। अर्थात् कृत्तिका में जब सूर्य रहते हैं तब ज्येष्ठ में भी ज्येष्ठ वर अथवा ज्येष्ठ कन्या का विवाह शुभ होता है। ज्येष्ठ वर और ज्येष्ठ कन्या का विवाह तो कभी भी शुभ नहीं होता ॥ १५ ॥ विवाहादिविशेष का निषेध सुतपरिणयात् षण्मासान्तः सुताकरपीडनं न च निजकुले तद्वद्वा मण्डनादपि मुण्डनम् । न च सहजयोर्देये भ्रात्रोः सहोदरकन्यके न सहजसुतोद्वाहोऽब्दार्द्धं शुभे न पितृक्रिया ॥ १६ ॥ अन्वयः—सुतपरिणयात् षण्मासान्तः सुताकरपीडनं न, च तद्वत् निजकुले मण्डनात् मुण्डनं अपि न, च (तथा) सहजयोः भ्रात्रोः सहोदरकन्यके न देये, अब्दार्धं सहजसुतोद्वाहः न, तथा शुभे पितृक्रिया न (कार्या) ॥ १६ ॥ एक कुल में किसी लड़के के विवाह के बाद छः महीने के भीतर किसी लड़की का विवाह और किसी लड़के या लड़की के विवाह के बाद छः महीने के भीतर किसी का मुण्डन न कराना चाहिए, अर्थात् लड़की के विवाह के बाद लड़के का विवाह और मुण्डन के बाद विवाह कराना चाहिए। सगे दो भाइयों के साथ सगी दो बहनों का विवाह, छः महीने के भीतर ही सगे