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मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

पृष्ठ 115, कुल 207 में से

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१०६ मुहूर्त्तचिन्तामणि दो भाइयों का विवाह, छः महीने के भीतर सगी दो बहिनों का विवाह नहीं कराना चाहिए अर्थात् सौतेले भाइयों और सौतेली बहिनों का करा सकते हैं। विवाहादि शुभ कार्यों में पितृश्राद्धादि न करना चाहिए, अर्थात् ऐसे समय में विवाह आदि की लग्न ठीक करना चाहिए कि जिसमें श्राद्ध का दिन न पड़े ॥ १६ ॥ विपत्ति में विवाह का विचार वध्वा वरस्यापि कुले त्रिपुरुषे नाशं व्रजेत् कश्चन निश्चयोत्तरम् । मासोत्तरं तत्र विवाह इष्यते शान्त्याथवा सूतकनिर्गमे परैः ॥ १७ ॥ अन्वयः—वध्वाः अपि वा वरस्य त्रिपुरुषे कुले, निश्चयोत्तरम्, यदि कश्चन नाशं व्रजेत् तत्र मासोत्तरं विवाह इष्यते, अथवा परैः सूतकनिर्गमे शान्त्या विवाहः देष्यते ॥ १७ ॥ विवाह का निश्चय होने पर यदि वर अथवा कन्या के वंश में तीन पुरुष के मध्य में कोई मर जाय तो उसके मरणदिन से महीने भर के बाद शान्ति* करके विवाह करे तो शुभ होता है, अथवा यदि आवश्यक हो तो अपने वर्ण के अनुसार अशौच व्यतीत हो जाने पर शान्ति करके विवाह करे, यह अन्य आचार्य कहते हैं ॥ १७ ॥ उक्त विषय पर विशेष चूडा-व्रतं चापि विवाहितो व्रताच्चूडा च नेष्टा पुरुषत्रयान्तरे । वधूप्रवेशाच्चसुतावनिर्गमः षण्मासतो वाब्दविभेदतः शुभः ॥ १८ ॥ अन्वयः—पुरुषत्रयान्तरे विवाहतः चूडा नेष्टा च व्रतं अपि (नेष्टम्) च तथा व्रतात् चूडा अपि नेष्टा, च (तथा) वधूप्रवेशात् सुतावनिर्गमः (नेष्टः) षण्मासतः परं वा अब्दविभेदतः शुभः स्यात् ॥ १८ ॥ किसी का विवाह होने के बाद छः महीने के भीतर उसी कुल में तीन पीढ़ी के अन्दर किसी का मुण्डन और यज्ञोपवीत शुभ नहीं होता । तथा किसी का यज्ञोपवीत होने के बाद छः महीने के भीतर किसी का मुण्डन शुभ नहीं होता तथा वधू-प्रवेश होने के बाद छः महीने के भीतर किसी का विवाह शुभ नहीं होता । यदि आवश्यक हो तो संवत्सर के भेद से छः महीने के भीतर भी करना चाहिए । यथा माघ में किसी का विवाह हुआ हो *याज्ञवल्क्य-संहिता में कही हुई गणेश की पूजा ।

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