मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
DevanagariHindipublished207 पृष्ठ
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संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 13
४ मुहूर्त्तचिन्तामणि मंगल को नन्दा, बुध को जया, बृहस्पति को रिक्ता, शुक्र को भद्रा और शनैश्चर को पूर्णा मृतसंज्ञक होती है। इनमें कोई शुभ कार्य न करना चाहिए। 'पूर्णामृतार्कात्' इसमें अकार का प्रश्लेष मानने से अमृत संज्ञा होती है अर्थात् शुभप्रद है। कुछ प्राचीन आचार्यों ने ऐसा ही कहा है। जैसे-आदित्यभौमयो- र्नन्दा भद्रा शुक्रशशांकयोः । जया सौम्ये गुरौ रिक्ता पूर्णाऽऽर्कावमृता शुभाः । आर्का = शनौ । तिथिवारमृत्युयोगचक्र
| रवि | सोम | मंगल | बुध | बृहस्पति | शुक्र | शनैश्चर |
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| सूर्यादि वारों में क्रम से भरणी, चित्रा, उत्तराषाढ़, धनिष्ठा, उत्तरा- | ||||||
| फाल्गुनी, ज्येष्ठा और रेवती ये नक्षत्र दग्धसंज्ञक हैं, अर्थात् रविवार को | ||||||
| भरणी, सोमवार को चित्रा, मंगल को उत्तराषाढ़, बुधवार को धनिष्ठा, | ||||||
| बृहस्पति को उत्तराफाल्गुनी, शुक्र को ज्येष्ठा और शनैश्चर को रेवती दग्ध- | ||||||
| संज्ञक हैं। इनमें कोई शुभ कार्य न करना चाहिए ॥ ५ ॥ | ||||||
| नक्षत्रवारदग्धयोगचक्र | ||||||
| रवि | सोम | मंगल | बुध | बृहस्पति | शुक्र | शनैश्चर |
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| भरणी | चित्रा | उत्तराषाढ़ | धनिष्ठा | उत्तराफाल्गुनी | ज्येष्ठा | रेवती |
| अधम तिथियाँ और दँतून करने का निषेध | ||||||
| षष्ठ्यादितिथयो मन्दाद्विलोमं प्रतिपद्बुधे । | ||||||
| सप्तम्यर्केऽधमाः षष्ठ्याद्यामाश्च रदधावने ॥ ६ ॥ | ||||||
| अन्वयः—मन्दात् विलोमं षष्ठ्यादितिथयः, बुधे प्रतिपत्, अर्के सप्तमी, (अधमाः) | ||||||
| च (पुनः) रदधावने षष्ठ्याद्यामाः अधमाः ॥ ६ ॥ | ||||||
| शनैश्चर से लेकर उलटे क्रम से रविवार तक षष्ठी सप्तमी आदि सीधे क्रम | ||||||
| से अधम संज्ञक होती हैं, अर्थात् शनैश्चर को षष्ठी, शुक्रवार को सप्तमी, | ||||||
| बृहस्पति को अष्टमी, बुधवार को नवमी, मंगल को दशमी, सोमवार को एका- |