मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
DevanagariHindipublished207 पृष्ठ
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शुभाशुभप्रकरण ५ दशी, रविवार को द्वादशी ये अधम संज्ञक हैं। इसे क्रकच योग कहते हैं। और बुधवार को प्रतिपदा तथा रविवार को सप्तमी भी अधम हैं। इसे संवर्तक योग कहते हैं। इनमें कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। अधम तिथियों का चक्र
| शनैश्चर | शुक्र | बृहस्पति | बुधवार | मंगल | सोमवार | रविवार | दिन |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ६ | १२ | ||||||
| ६ | ७ | ८ | १ | १० | ११ | ७ | तिथि |
| षष्ठी, प्रतिपदा और अमावस ये तिथियाँ दँतून करने में निषिद्ध हैं | |||||||
| अर्थात् इनमें दँतून न करना चाहिए ॥ ६ ॥ | |||||||
| तैल आदि का निषेध | |||||||
| षष्ठ्यष्टमीभूतविधुक्षयेषु नो सेवेत ना तैलपले क्षुरं रतम् । | |||||||
| नाभ्यञ्जनं विश्वदशाद्विके तिथौ धात्रीफलैः स्नानममाद्रिगोष्वसत् ॥ ७ ॥ | |||||||
| अन्वयः—षष्ठ्यष्टमीभूतविधुक्षयेषु (क्रमेण) ना (पुरुषः) तैलपले, क्षुरं, रत नो | |||||||
| सेवेत । विश्वदशाद्विके तिथौ अभ्यञ्जनं (तथा) अमाद्रिगोषु धात्रीफलैः स्नानं | |||||||
| असत् ॥ ७ ॥ | |||||||
| छठि, अष्टमी, चतुर्दशी, अमावस—इन तिथियों में क्रम से पुरुष तेल, | |||||||
| मांस, क्षौर, रति इन कर्मों को न करे, अर्थात् छठि को तेल न लगावे, | |||||||
| अष्टमी को मांसभक्षण न करे, चतुर्दशी को बाल न बनवावे और अमावस | |||||||
| को मैथुन¹ न करे । त्रयोदशी, दशमी, दुइज—इन तिथियों में उबटन न लगावे । | |||||||
| अमावस, सप्तमी, नवमी—इन तिथियों में आँवला के फलसहित स्नान | |||||||
| न करे ॥ ७ ॥ | |||||||
| दग्ध, विषाख्य, हुताशन और यमघंट योग | |||||||
| सूर्ये शपञ्चाग्निरसाष्टनन्दा वेदाङ्गसप्ताश्विगजाङ्कशैलाः । | |||||||
| सूर्याङ्गसप्तोरगगोदिगीशा दग्धा विषाख्याश्च हुताशनाश्च ॥ ८ ॥ | |||||||
| सूर्यादिवारे तिथयो भवन्ति मघाविशाखाशिवमूलवह्निः । | |||||||
| ब्राह्मं करोर्काद्यमघण्टकाश्च शुभे विवर्ज्यागमने त्ववश्यम् ॥ ९ ॥ | |||||||
| १—अमावास्यां पौर्णमास्यां च दारां न गच्छेद्यदि गच्छेत्तर्हि निरिन्द्रियो भवेत् । |