मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाहप्रकरण १३७
चन्द्रमा के नक्षत्र की इक्कीस संख्या और सूर्य के नक्षत्र की सत्रह संख्या हुई । इन दोनों का जोड़ अड़तीस हुआ । इसमें सत्ताइस का भाग दिया तो बाकी गेरह बचे । उक्त रीति से यह अङ्क दोषी है, इसलिए उत्तराषाढ़ नक्षत्र में विवाह शुभ नहीं है। ये दश अङ्क गिनाये गये हैं; इसलिए इनका दशयोग नाम पड़ गया है ॥ ७० ॥ उक्त दश दोषों का फल वाताभ्राग्निमहीपचोरमरणं रुग्वज्रवादाः क्षति- र्योगाङ्के दलिते समे मनुयुतेऽथौजे तु संकेऽर्द्धिते । भं दस्रादथ संमितास्तु मनुभीरेखाः क्रमात् संलिखे- द्वेधेऽस्मिन् ग्रहचन्द्रयोर्न शुभदः स्यादेकरेखास्थयोः ॥ ७१ ॥ अन्वयः—वाताभ्राग्निमहीपचोरमरणं रुग्वज्रवादाः क्षतिः (इति क्रमेण दशयोग- फलानि ज्ञेयानि) अथ समे योगाङ्के दलिते मनुयुते ओजे [योगांके] सैके अर्द्धिते (सति) दस्रात् भं (ज्ञेयम्) अथ मनुभिः सम्मिताः रेखाः क्रमात् संलिखेत् अस्मिन् एकरेखा- स्थयोः ग्रहचन्द्रयोः वेधः न शुभदः स्यात् ॥ ७१ ॥ इन पूर्व कहे हुए दश अङ्कों में से यदि शून्य शेष हो तो विवाहकाल में वायु बहुत चले, एक शेष हो तो बादल बहुत हों, चार शेष हों तो अग्नि लगे, छः शेष हों तो राजदण्ड हो, दश शेष हों तो चोरी हो, गेरह शेष हों तो मरण हो, पन्द्रह शेष हों तो रोग हो, अठारह शेष हों तो बिजली गिरे, उन्नीस शेष हों तो झगड़ा हो, बीस शेष हों तो हानि हो । इस कारण इन दश योगों को विवाह, देवादिप्रतिष्ठा, यज्ञोपवीत, पुंसवनकर्म, कर्णछेद, मुण्डनादि शुभ कर्मों में त्यागना चाहिए । अब इन दश योगों का परिहार कहते हैं । पूर्व कहे हुए दश अङ्कों में से यदि सम अङ्कवाला योग आ पड़े तो उसके दो भाग करके एक भाग में चौदह और मिलावे और यदि विषम अङ्कवाला योग आ पड़े तो उसमें एक और मिलाकर सम करे। तदनन्तर उसके दो भाग करके एक भाग में चौदह और मिलावे । तब जितनी संख्या हो अश्विनी से लेकर उतनी संख्यावाले नक्षत्र को आड़ी चौदह लकीरों से बने हुए चक्र के आदि में लिखकर क्रम से अभिजित् सहित अट्ठाइस नक्षत्र रेखाओं के छोरों पर लिखे । उन नक्षत्रों में जो ग्रह स्थित हों उन्हें भी वहीं लिखे । यदि इस चक्र में किसी ग्रह और चन्द्रमा का परस्पर वेध हो तो वह अशुभ होता है, अर्थात् इस चक्र की किसी एक ही रेखा के एक छोर पर चन्द्रमा हो और दूसरे छोर