भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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१३६ मुहूर्तचिन्तामणि है। यह जामित्र दोष विवाहादि शुभ कार्यों में अति अशुभकारक होता है ॥ ६७ ॥ एकार्गलादि दोषों का परिहार एकार्गलोपग्रहपातलत्ताजामित्रकर्तर्युदयास्तदोषाः । नश्यन्ति चन्द्रार्कबलोपपन्ने लग्ने यथार्काभ्युदये तु दोषा ॥ ६८ ॥ अन्वयः—चन्द्रार्कबलोपपन्ने लग्ने [सति] एकार्गलोपग्रहपातलत्ताजामित्रकर्तर्युदयास्त- दोषाः नश्यन्ति, यथा अर्काभ्युदये दोषा (रात्रिः नश्यति) ॥ ६८ ॥ यदि विवाह लग्न सूर्य-चन्द्रमा के स्वोच्चादि-स्थान-स्थितिरूप बल से युक्त हो तो एकार्गल, उपग्रह, पात, लत्ता, जामित्र, कर्तरी, उदयास्तदोष, ये सब नष्ट हो जाते हैं, जैसे सूर्य के उदय होते ही रात्रि नष्ट हो जाती है ॥ ६८ ॥ देशभेद से उक्त दोषों का परिहार उपग्रहक्षं कुरुबाह्लिकेषु कलिङ्गबंगेषु च पातितं भम् । सौराष्ट्रशाल्वेषु च लत्तितं भं त्यजेत्तु विद्धं किल सर्वदेशे ॥ ६९ ॥ अन्वयः—कुरुबाह्लिकेषु [देशेषु] उपग्रहक्षं, च कलिङ्गबङ्गेषु पातितं भं, च सौराष्ट्र- शाल्वेषु लत्तितं भं त्यजेत्, विद्धं भं तु सर्वदेशे किल (निश्चयेन) त्यजेत् ॥ ६९ ॥ कुरु और बाह्लीक, इन पश्चिम के देशों में उपग्रह दोषयुक्त नक्षत्र का; कलिङ्ग और बङ्ग, इन पूर्व के देशों में पात दोष का; सौराष्ट्र और शाल्व, इन पश्चिम के देशों में लत्तादोषयुक्त नक्षत्र का और पञ्चशलाकादि चक्र द्वारा ग्रहों से वेधे हुए नक्षत्र का सब देशों में त्याग करना चाहिए ॥ ६९ ॥ दश दोष शशाङ्कसूर्यक्षयुतेर्भशेषं खं भूयुगाङ्गानि दशेशतिथ्यः । नागेन्दवोऽङ्केन्दुमिता नखाश्चेद्भवन्ति चैते दशयोगसंज्ञाः ॥ ७० ॥ अन्वयः—शशाङ्कसूर्यक्षयुतेः भशेषं खं भूयुगांगानि दशेशतिथ्यः नागेन्दवः अंकेन्दुमिताः नखाः चेत् (यदि) भवन्ति च (तदा) एते (क्रमेण) दशयोगसंज्ञाः (भवन्ति) ॥ ७० ॥ अश्विनी से लेकर सूर्य और चन्द्रमा के नक्षत्र तक अलग-अलग गिने । फिर उन दोनों संख्याओं को जोड़कर उसमें सत्ताइस का भाग देने से यदि शून्य, एक, चार, छः, दस, गेरह, पन्द्रह, अठारह, उन्नीस, बीस ये अङ्क बाकी बचें तो दोषी होते हैं, उस नक्षत्र में विवाह शुभ नहीं होता । उदाहरण—यथा उत्तराषाढ़ में चन्द्रमा और अनुराधा नक्षत्र में सूर्य स्थित है । अश्विनी से