भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

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विवाहप्रकरण १३५ कुलिकमुहूर्त्तचक्र

र०चं०मं०बु०बृ०शु०श०वार
१४१२१०दिन मुहूर्त्त
१३१११।१५रात्रि मुहूर्त्त

दग्धातिथि चापान्त्यगे गोघटगे पतङ्गे कर्काजगे स्त्रीमिथुने स्थिते च । सिंहालिगे नक्रधटे समाः स्युस्तिथ्यो द्वितीयाप्रमुखाश्च दग्धाः ॥ ६६ ॥ अन्वयः—चापान्त्यगे, गोघटगे, कर्काजगे, स्त्रीमिथुने स्थिते च सिंहालिगे नक्रधटे, पतंगे [सूर्ये] सति (क्रमेण) द्वितीयाप्रमुखाः समाः तिथ्यः दग्धाः (भवन्ति) ॥ ६६ ॥ धनु-मीनादि राशियों में सूर्य के स्थित रहते द्वितीयादि सम तिथियां दग्धसंज्ञक होती हैं, अर्थात् धनु और मीन राशि में सूर्य के स्थित रहते द्वितीया, वृष और कुम्भ राशि में सूर्य के रहते चतुर्थी, कर्क और मेष राशि में सूर्य के रहते षष्ठी, कन्या और मिथुन राशि में सूर्य के रहते अष्टमी, सिंह और वृश्चिक राशि में सूर्य के रहते दशमी तथा मकर और तुला राशि में सूर्य के रहते द्वादशी तिथि दग्धा होती है। दग्धा तिथि में विवाहादि शुभ काम न करना चाहिए ॥ ६६ ॥ दग्धातिथिचक्र

धनु-मीनवृष कुम्भकर्क मेषकन्या मिथुनसिंह वृश्चिकमकर तुलासंक्रांति
१०१२तिथिदग्धा

जामित्र दोष लग्नाच्चन्द्रान्मदनभवनगे खेटे न स्यादिह परिणयनम् । किंवा बाणाशुगमितलवगे जामित्रं स्यादशुभकरमिदम् ॥ ६७ ॥ अन्वयः—लग्नात् (वा) चन्द्रात् मदनभवनगे किंवा बाणाशुगमितलवगे खेटे (सति) जामित्रं स्यात्, इह परिणयनं न स्यात्, इदं अशुभकरं स्यात् ॥ ६७ ॥ विवाह की लग्न से अथवा चन्द्रमा से सातवें स्थान में यदि कोई ग्रह स्थित हो तो जामित्र दोष होता है। जामित्र दोष में विवाह न करना चाहिए । लग्न और चन्द्रमा जिस नवांश में हो उससे पचपनवें नवांश में यदि कोई ग्रह स्थित हो तो, और कोई ग्रह जिस नवांश में स्थित हो उससे पचपनवें नवांश में यदि लग्न या चन्द्रमा हो तो भी जामित्र दोष होता