भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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विवाहप्रकरण १३९ दक्षिण देशों में प्रसिद्ध बाणदोष लग्नेनाढ्या याततिथ्योऽङ्कतष्टाः शेषेनागद्व्यब्धिधतर्केन्दुसंख्ये । रोगो वह्नी राजचौरौ च मृत्युर्बाणश्चायं दाक्षिणात्यप्रसिद्धः ॥ ७२ ॥ अन्वयः-याततिथयः लग्नेन आढ्याः अंकतष्टाः नागद्व्यब्धिधतर्केन्दुसंख्ये शेषे (सति क्रमेण) रोगः, वह्निः, राजचौरौ (तथा) मृत्युबाणः स्यात्, च अयं दाक्षिणात्यप्रसिद्धः स्यात् ॥ ७२ ॥ शुक्लपक्ष की परीवा से लेकर जितनी तिथि बीत गई हों उनमें लग्न की राशि की संख्या को जोड़कर नव का भाग देने पर यदि आठ बाकी रहें तो रोगबाण, दो बाकी रहें तो अग्नि बाण, चार शेष रहें तो राजबाण, छः शेष रहें तो चोरबाण और एक शेष रहे तो मृत्युबाण दोष होता है । यह विवाहादि कार्यों में अशुभ होता है । यह बाणदोष दक्षिण देश के लोगों में प्रसिद्ध है ॥ ७२ ॥