भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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विवाहप्रकरण १४१

अन्वयः—द्याशं, त्रिकोणं, चतुरस्रं, अस्तं (सप्तमं) खेटाः चरणाभिवृद्धया पश्यन्ति, च [तथा] मन्दः, गुरुः, भूमिसुतः, परे [रविचन्द्रबुधशुक्राः] क्रमेण सम्पूर्णदृशः भवन्ति ॥ ७५ ॥ सब ग्रह अपने स्थान से तीसरे-दशवें, पाँचवें-नवें, चौथे-आठवें और सातवें स्थान को पादवृद्धि से देखते हैं, अर्थात् तीसरे-दशवें स्थान को एक पाद अर्थात् चौथाई दृष्टि से, पाँचवें-नवें स्थान को दो पाद अर्थात् आधी दृष्टि से, चौथे-आठवें स्थान को तीन पाद अर्थात् पौन दृष्टि से और सातवें स्थान को चार पाद अर्थात् पूर्णदृष्टि से देखते हैं। अपने स्थान से तीसरे- दशवें स्थान को शनैश्चर, पाँचवें-नवें स्थान को बृहस्पति, चौथे-आठवें स्थान को मंगल पूर्णदृष्टि से देखता है ॥ ७५ ॥ लग्नस्थान की शुद्धि यदा लग्नांशेशो लवमथ तनुं पश्यति युतो भवेद्वाऽयं वोढुः शुभफलमनल्पं रचयति । लवद्यूनस्वामी लवमदनभं लग्नमदनं प्रपश्येद्वा वध्वाः शुभमितरथा ज्ञेयमशुभम् ॥ ७६ ॥ अन्वयः—यदा लग्नांशेशः लग्नं अथ (अथवा) तनुं पश्यति वा युतो भवेत् (तदा) अयं वोढुः अनल्पं शुभफलं रचयति । यदि लवद्यूनस्वामी लवमदनभं लग्नमदनं वा प्रपश्येत् (तदा) वध्वाः शुभं रचयति इतरथा अशुभं ज्ञेयम् ॥ ७६ ॥ यदि विवाहकालिक लग्न से नवांश का स्वामी लग्न के नवांश को या लग्न को देखतां हो, अथवा नवांश या लग्न में स्थित हो तो वह वर को अति शुभ फल देता है। नवांश का उदाहरण—यथा मेष लग्न में मिथुन का नवांश हो, उसका स्वामी बुध तुला में स्थित होकर मिथुन के नवांश को देखता हो, अथवा उसी में स्थित हो । लग्न का उदाहरण—यथा मेष लग्न में मिथुन के नवांश का स्वामी बुध, मकरराशि में स्थित होकर मिथुन- नवांश को नहीं देखता और मेष लग्न को देखता है या उसी में स्थित है । अब सातवें स्थान की शुद्धि कहते हैं। लग्न के नवांश से सातवें नवांश का स्वामी यदि लग्न से सातवें भाव के नवांश को या सातवें भाव को देखता हो या उसी में स्थित हो तो स्त्री को अति शुभ फल करता है । नवांश का उदाहरण—यथा मेष लग्न में मिथुन का नवांश है, उससे सातवें धनु के नवांश का स्वामी बृहस्पति, लग्न से सातवें तुला भाव में स्थित होकर धनु नवांश

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