मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविवाहप्रकरण १४९
अन्वयः—सितः श्वश्रूः, अर्कः श्वशुरः, तनुः [लग्नं] तनुः [शरीरं] जामित्रपः दयितः, शशी मनः स्यात् । तान्त्रिकः एतद्बलं संप्रतिभाव्य विवाहतः तेषां सुखं संप्रवदेत् ॥ ६३ ॥ शुक्र सासुसंज्ञक, सूर्य ससुरसंज्ञक, लग्न देहसंज्ञक, लग्न से सातवें स्थान का स्वामी पतिसंज्ञक और चन्द्रमा मनसंज्ञक होता है । विवाहकाल में इन ग्रहों के बल का विचार करके ज्योतिषी को चाहिए कि कन्या के ससुर आदि के सुख दुःख को कहे । विवाहकाल में यदि शुक्र बली हो तो कन्या की सासु को पतोहू की ओर से सुख, यदि सूर्य बली हो तो ससुर को सुख, यदि लग्न बली हो तो कन्या के शरीर को सुख, यदि लग्न से सातवें स्थान का स्वामी बली हो तो कन्या के पति को सुख और चन्द्रमा बली हो तो कन्या के मन को सुख देता है ॥ ९३ ॥ संकरवर्णों के विवाह का मुहूर्त कृष्णे पक्षे सौरिकुजार्केऽपि च वारे वर्ज्ये नक्षत्रे यदि वा स्यात्करपीडा । संकीर्णानां तर्हि सुतायुर्धनलाभ- प्रीतिप्राप्त्यै सा भवतीह स्थितिरेशा ॥ ९४ ॥ अन्वयः—कृष्णे पक्षे अपि च सौरिकुजार्के वारे वर्ज्ये नक्षत्रे वा यदि संकीर्णानां करपीडा स्यात् (तदा) सा (करपीडा) सुतायुर्धनलाभप्रीतिप्राप्त्यै भवति, इह एषा स्थितिः (स्यात्) ॥ ६४ ॥ कृष्णपक्ष में, शनैश्चर, मंगल वा रविवार में, और विवाह में वर्जित नक्षत्रों में यदि संकर वर्णों का विवाह हो तो उनको पुत्र, आयु, धन, लाभ और प्रीति की प्राप्ति होती है ॥ ९४ ॥ गान्धर्वादि विवाह और त्रिपदीचक्र में नक्षत्रशुद्धि गान्धर्वादिविवाहेऽर्काद्वेदनेत्रगुणेन्दवः । कुयुगाङ्गाग्निभूरामास्त्रिपद्यामशुभाः शुभाः ॥ ९५ ॥ अन्वयः—गान्धर्वादिविवाहे त्रिपद्यां अर्कात् (अर्कनक्षत्रात्) वेदनेत्रगुणेन्दवः कुयुगां- गाग्निभूरामाः (क्रमात्) अशुभाः शुभाः (स्मृताः) ॥ ६५ ॥ गान्धर्वादि विवाह में सूर्य के नक्षत्र से चार नक्षत्र अशुभ, फिर दो नक्षत्र शुभ, फिर तीन नक्षत्र अशुभ, फिर एक नक्षत्र शुभ, फिर एक नक्षत्र