मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
पृष्ठ 175, कुल 207 में से
संदर्भ में पढ़ें१६६ मुहूर्त्तचिन्तामणि कुम्भ इनमें से कोई राशि प्रश्नलग्न में हो तो यात्रा करनेवाले राजा की विजय होती है ॥ ३ ॥ अथवा यात्रा पूछनेवाला ऐसे स्थान में पूछे कि जहाँ की भूमि, फूल, दूर्वा, देवमंदिर आदि शुभ वस्तुओं से अति मनोरम हो अथवा यात्रा पूछने के समय कोई शुभ वस्तु देखने या सुनने में आवे अथवा यात्रा पूछनेवाला बड़े आदर से पूछे, अथवा मेष, कर्क, तुला, मकर इन राशियों में से कोई प्रश्नलग्न में हो और शुभग्रह उसे देखते हों या उस लग्न में हों तो भी यात्रा करनेवाले की विजय होती है ॥ ४ ॥ प्रश्नकालिक अशुभ यात्रायोग विधुकुजयुतलग्ने सौरिदृष्टेऽथ चन्द्रे मृतिभमदनसंस्थे लग्नगे भास्करेऽपि । हिबुकनिधनहोराद्यूनगे वापि पापे सपदि भवति भंगः प्रश्नकर्तुस्तदानीम् ॥ ५ ॥ अन्वयः—अथ विधुकुजयुतलग्ने सौरिदृष्टे, चन्द्रे मृतिभमदनसंस्थे, अपि वा भास्करे लग्नगे, अपि वा पापे हिबुकनिधनहोराद्यूनगे, तदानी प्रश्नकर्तुः सपदि भंगः भवति ॥ ५ ॥ यदि प्रश्नकालिक लग्न में चन्द्रमा या मंगल हो और शनैश्चर उसे देखता हो, अथवा प्रश्नकालिक लग्न में सूर्य हो और उससे सातवें या आठवें स्थान में चन्द्रमा हो, अथवा प्रश्नलग्न में या उससे चौथे, आठवें, सातवें स्थानों में पापग्रह हो तो यात्रा करनेवाले का नाश या पराजय होता है ॥ ५ ॥ प्रश्नद्वारा यात्रा की दिशा का निर्णय त्रिकोणे कुजात्सौरिशुक्रज्ञजीवा यदैकोऽपि वा नो गमोर्काच्छशी वा । बलीयांस्तु मध्ये तयोर्यो ग्रहः स्या- त्स्वकीयां दिशं प्रत्युतासौ नयेच्च ॥ ६ ॥ प्रश्ने गम्यदिगीशात्खेटः पञ्चमगो यः । बोभूयाद्बलयुक्तः स्वामाशां नयेत्दसौ ॥ ७ ॥ अन्वयः—सौरिशुक्रज्ञजीवाः (सर्वे) वा एकोऽपि यदा कुजात् त्रिकोणे (स्थितः) वा शशी अर्कात् त्रिकोणे स्यात् तदा गमः [गमनं] नो भवेत्, प्रत्युत तयोर्मध्ये यः ग्रहः बलीयान् स्यात् असौ स्वकीयां दिशं नयेत् । प्रश्ने गम्यदिगीशात् पञ्चमगः यः खेटः बलयुक्तः बोभूयात् असौ स्वां आशां नयेत् ॥ ६-७ ॥