मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंयात्राप्रकरण १६९ भाग में अश्विनी और अभिजित् में यात्रा न करे । ऐसे ही रात्रि के तीन भाग करके पहिले भाग में रेवती, चित्रा और अनुराधा में; दूसरे भाग में तीनों पूर्वा, भरणी और मघा में और तीसरे भाग में स्वाती, पुनर्वसु, धनिष्ठा और शतभिष में यात्रा न करनी चाहिए । श्रवण, हस्त, पुष्य, मृगशिरा, इन नक्षत्रों में सब काल में यात्रा शुभ होती है ॥ ११ ॥ यात्रा में मध्यम नक्षत्र तथा कई निषिद्ध नक्षत्रों की त्याज्य घटी पूर्वाग्निपित्र्यान्तकतारकाणां भूपप्रकृत्युग्रतुरङ्गमाः स्युः । स्वातीविशाखेन्द्रभुजङ्गमानां नाड्यो निषिद्धा मनुसंमिताश्च ॥ १२ ॥ अन्वयः-पूर्वाग्निपित्र्यान्तकतारकाणां भूपप्रकृत्युग्रतुरंगमाः नाड्यः, च स्वाती- विशाखेन्द्रभुजङ्गमानां मनुसम्मताः नाड्यः निषिद्धाः स्युः ॥ १२ ॥ तीनों पूर्वाओं के प्रथम सोलह दण्ड, कृत्तिका के इक्कीस दण्ड, मघा के ग्यारह दण्ड, भरणी के सात दण्ड, और स्वाती, विशाखा, ज्येष्ठा, श्लेषा, इन नक्षत्रों के चौदह दण्ड यात्रा में निषिद्ध होते हैं ॥ १२ ॥ अन्यमत से त्याज्य घटी पूर्वार्द्धमाग्नेयमघानिलानां त्यजेद्धि चित्राहियमोत्तरार्द्धम् । नृपः समस्तां गमने जयार्थी स्वातीं मघां चोशनसो मतेन ॥ १३ ॥ अन्वयः-जयार्थी नृपः गमने आग्नेयमघानिलानां पूर्वार्द्धं, चित्राहियमोत्तरार्द्धं हि त्यजेत्, च उशनसः मतेन स्वातीं मघां समस्तां त्यजेत् ॥ १३ ॥ विजय चाहनेवाला राजा कृत्तिका, मघा और स्वाती का पूर्वार्द्ध तथा चित्रा, श्लेषा और भरणी का उत्तरार्द्ध यात्रा में त्याग दे । शुक्राचार्य के मत से सम्पूर्ण स्वाती और सम्पूर्ण मघा को यात्रा में त्याग दे ॥ १३ ॥ नक्षत्रों की जीवपक्षादि संज्ञा तमोमुक्तताराः स्मृता विश्वसंख्याः शुभो जीवपक्षो मृतश्चापि भोग्याः । तदाक्रान्तभं कर्तरीसंज्ञमुक्तं ततोऽक्षेन्दुसंख्यं भवेद्ग्रस्तनाम ॥ १४ ॥ अन्वयः-विश्वसंख्याः तमोमुक्तताराः जीवपक्षः शुभः स्मृतः, च भोग्याः विश्वसंख्याः मृतः उक्तः, तदा क्रान्तभं कर्तरीसंज्ञं उक्तम, ततः (राहोः) अक्षेन्दुसंख्यं ग्रस्तनाम भवेत् ॥ १४ ॥ राहु के भुक्त तेरह नक्षत्र जीवपक्षसंज्ञक, और भोग्य तेरह नक्षत्र मृतपक्ष- संज्ञक होते हैं और जिस नक्षत्र में राहु स्थित हो वह नक्षत्र कर्तरीसंज्ञक और उससे पन्द्रहवाँ नक्षत्र ग्रस्तसंज्ञक होता है । इनमें यात्रा के लिए