भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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१७० मुहूर्त्तचिन्तामणि जीवपक्ष शुभ होता है। उदाहरण—जैसे हस्त नक्षत्र में राहु हो तो उसके उलटे चलने के कारण चित्रा से लेकर पूर्वाभाद्रपद तक तेरह नक्षत्र भुक्त होंगे उनकी जीवपक्ष संज्ञा होगी, और उत्तराफाल्गुनी से पूर्व रेवती तक तेरह नक्षत्र भोग्य होंगे उनकी मृतपक्ष संज्ञा होगी, और हस्त कर्तरी- संज्ञक तथा उत्तराभाद्रपद ग्रस्तसंज्ञक होगा। ये सब नीचे के चक्र में स्पष्ट ज्ञात होंगे ॥ १४॥ जीवपक्षादि संज्ञाचक्र कर्तरी [ह.] [चि.] [स्वा.] [वि.] [अनु.] [ज्ये.] [मू.] [पू.] जीवपक्ष [उ.]                         [उ.] [पू.]                         [अ.] [म.]                         [श्र.] [श्ले.]                        [ध.] [पु.]                         [श.] [पु.]                         [पू.] मृतपक्ष [आ.] [मृ.] [रो.] [कृ.] [म.] [अ.] [रे.] [उ.] ग्रस्त जीवपक्षादि का विशेष फल मार्त्तण्डे मृतपक्षगे हिमकरश्चेज्जीवपक्षे शुभा यात्रा स्याद्विपरीतग क्षयकरी द्वौ जीवपक्षे शुभा। ग्रस्तर्क्षं मृतपक्षतः शुभकरं ग्रस्तात्तथा कर्तरी यायीन्दुः स्थितिमान्रविर्जयकरौ तौ द्वौ तयोर्जीवगौ ॥ १५॥ अन्वयः—मार्त्तण्डे मृतपक्षगे चेत्, हिमकरः जीवपक्षे, तदा यात्रा शुभा स्यात्, विप- रीतगे क्षयकरी स्यात्, द्वौ यदि जीवपक्षे तदा यात्रा शुभा, ग्रस्तर्क्षं मृतपक्षतः शुभकरं, तथा ग्रस्तात् कर्तरी [शुभकरा] तथा इन्दुः यायी, रविःस्थितिमान्, तौ द्वौ जीवगौ तयोः [यायिस्थायिनोः] जयकरौ ॥ १५॥