मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१७८ मुहूर्त्तचिन्तामणि रूपद्वग्न्यग्निभूरामं द्वयब्ध्यग्न्यब्धियुगाग्नयः । घातचन्द्रे धिष्ण्यपादा मेषाद्वर्ज्या मनीषिभिः ॥ २९ ॥ अन्वयः—आग्नेयत्वाष्ट्रजलपपित्र्यवासवरौद्रभे मूलब्राह्म्याजपादक्षं पित्र्यमूलाजभे क्रमात् मेषादीनां (घातको ज्ञेयः) । मेषात्घातचन्द्रे (क्रमात्) रूपद्वग्न्यग्निभूराम- द्वयब्ध्यग्न्यब्धियुगाग्नयः धिष्ण्यपादाः मनीषिभिः वर्ज्याः ॥ २८-२९ ॥ मेष राशिवाले को कृत्तिका का पहिला चरण घातक है, वृष राशिवाले को चित्रा का दूसरा पाद घातक है, मिथुन राशिवाले को शतभिष का तीसरा पाद घातक है, कर्क राशिवाले को मघा का तीसरा पाद घातक है, सिंह राशिवाले को धनिष्ठा का पहिला पाद घातक है, कन्या राशिवाले को आर्द्रा का तीसरा पाद घातक है, तुला राशिवाले को मूल का दूसरा पाद घातक है, वृश्चिक राशिवाले को रोहिणी का चौथा पाद घातक है, धनु राशिवाले को पूर्वाभाद्रपद का तीसरा पाद घातक है, मकर राशिवाले को मघा का चौथा पाद घातक है, कुम्भ राशिवाले को मूल का दूसरा पाद घातक है और मीन राशिवाले को पूर्वाभाद्रपद का तीसरा पाद घातक होता है। ये कृत्तिका आदि के घातपाद यात्रा आदि में पण्डितों को वर्जित करना चाहिए ॥ २८-२९ ॥ घातक नक्षत्रपाद चक्र
| मे० | वृ० | मि० | क० | सिं० | कं० | तु० | वृ० | ध० | म० | कुं० | मी० | राशि |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कृ० | चि० | श० | म० | ध० | आ० | मू० | रो० | पू० भा० | म० | मू० | पू० भा० | नक्षत्र |
| १ | २ | ३ | ३ | १ | ३ | २ | ४ | ३ | ४ | २ | ३ | पाद |
| घातक तिथियाँ | ||||||||||||
| गोस्त्रीझषे घाततिथिस्तु पूर्णा भद्रा नृयुक्कर्कटकेऽथ नन्दा । | ||||||||||||
| कौर्प्याजयोर्नक्रघटे च रिक्ता जया धनुः कुम्भहरौ न शस्ता ॥ ३० ॥ | ||||||||||||
| अन्वयः—गोस्त्रीझषे पूर्णा घाततिथिः (स्यात्) तु (तथा) नृयुक्कर्कटके भद्रा घात- | ||||||||||||
| तिथिः, अथ कौर्प्याजयोः नन्दा, नक्रघटे रिक्ता, धनुः कुम्भहरौ जया घाततिथिः (ताः) | ||||||||||||
| न शस्ताः (स्युः) ॥ ३० ॥ | ||||||||||||
| वृष, कन्या और मीन राशिवाले को पञ्चमी, दशमी, पूर्णमासी, | ||||||||||||
| अमावास्या ये तिथियाँ घातक हैं । मिथुन और कर्क राशिवाले को द्वितीया, | ||||||||||||
| सप्तमी और द्वादशी घातक हैं । वृश्चिक और मेष राशिवाले को परीवा, | ||||||||||||
| छठि और एकादशी । मकर और तुला राशिवाले को चौथि नवमी और |