भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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१८४ मुहूर्तचिन्तामणि अन्वयः—यदि सूर्यविधू सौम्यायने तदा उत्तरां प्राचीं व्रजेत्, यदि तौ दक्षिणायने तदा प्रत्यग्यमाशां व्रजेत् । अथ च तयोः भिन्नायनत्वे दिवानिशं व्रजेत्, अन्यथा वधः भवेत् ॥ ३६ ॥ जब सूर्य और चन्द्रमा उत्तरायण में हों तब उत्तर और पूर्व की यात्रा, और जब दक्षिणायन में हों तब पश्चिम और दक्षिण की यात्रा करे, और यदि सूर्य और चन्द्रमा का अयन भिन्न हो, अर्थात् एक दक्षिणायन और दूसरा उत्तरायण हो तो कहे हुए क्रम से सूर्य के अयन की दिशाओं की यात्रा दिन में और चन्द्रमा के अयन की दिशाओं की यात्रा रात्रि में करे । इससे अन्यथा यात्रा करनेवाले का नाश होता है ॥ ३९ ॥ सम्मुख शुक्रदोष उदेति यस्यां दिशि यत्र याति गोलभ्रमाद्वाथ ककुब्भसङ्घे । त्रिधोच्यते सम्मुख एव शुक्रो यत्रोदितस्तां तु दिशं न यायात् ॥ ४० ॥ अन्वयः—यस्यां दिशि उदेति गोलभ्रमाद्, वा यत्र दिशि याति, अथवा ककुब्भसंघे (यत्र तिष्ठति), त्रिधा शुक्रः सम्मुख एव उच्यते । शुक्रः यत्र दिशि उदितः तां दिशं तु न यायात् ॥ ४० ॥ जिस दिशा में उदित हो, अथवा गोलभ्रम* वश होकर जिस दिशा में जाता हो, अथवा दिग्द्वार नक्षत्रों के क्रम से जिस दिशा में हो, इन तीन प्रकार से शुक्र सम्मुख कहा जाता है । परन्तु राजा को चाहिए कि जिस दिशा में शुक्र उदित हो उस दिशा की यात्रा न करे ॥ ४० ॥ वक्रनीचादिस्थित शुक्रदोष वक्रास्तनीचोपगते भृगोः सुते राजा व्रजन्याति वशं हि विद्विषाम् । बुधोऽनुकूलो यदि तत्र संचलन् रिपूञ्जयेन्नैव जयः प्रतीन्दुजे ॥ ४१ ॥ अन्वयः—भृगो सुते वक्रास्तनीचोपगते व्रजन् राजा हि विद्विषां वशंयाति । यदि बुधः अनुकूलः तत्र संचलन् रिपून् जयेत्, प्रतीन्दुजे (सम्मुखबुधे) जयः नैव ॥ ४१ ॥ यदि वक्रमार्ग तथा नीचस्थान में शुक्र के रहते यात्रा करे तो राजा शत्रुओं के वशीभूत होता है । परन्तु शुक्र के वक्रादि रहते भी यदि बुध अनुकूल अर्थात् पीछे स्थित हो तो यात्रा करनेवाला राजा शत्रुओं को अवश्य ही जीत लेता है, और यदि बुध सम्मुख हो तो जय नहीं होती ॥ ४१ ॥ *मेष से लेकर कन्याराशि पर्यन्त सूर्य के रहते उत्तर गोल और तुला से लेकर मीनराशिपर्यन्त सूर्य के रहते दक्षिण गोल होता है ।