मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशुभाशुभप्रकरण १३ दुष्ट योगों का परिहार ध्वांक्षे वज्रे मुद्गरे चेषुनाड्यो वर्ज्या वेदाः पद्मलुम्बे गदेश्वाः । धूम्रे काले मौसले भूर्द्वयं द्वे रक्षो मृत्यूत्पातकालाश्च सर्वे ॥ २६ ॥ अन्वयः-ध्वांक्षे वज्रे मुद्गरे (योगे) इषुनाड्यः, पद्मलुम्बे (योगे) वेदाः, गदे अश्वाः [सप्त] नाड्यः वर्ज्याः । धूम्रे भूः, काणे द्वयं, मौसले द्वे, च (पुनः) रक्षो- मृत्यूत्पातकालाः (योगः) सर्वे वर्ज्याः ॥ २६ ॥ ध्वांक्ष, वज्र, मुद्गर इन तीन योगों में प्रथम पाँच दण्ड; पद्म, लुम्ब इन दो में प्रथम चार दण्ड, गद योग में प्रथम सात दण्ड; धूम्र में एक दण्ड; काण में दो दण्ड; मुसल में दो दण्ड, और रक्ष, मृत्यु, उत्पात, काल, ये सम्पूर्ण, शुभ कार्यों में वर्जनीय हैं ॥ २६ ॥ सम्पूर्ण दोषों का नाशक रवियोग सूर्यभाद्वेदगोतर्कदिग्विश्वनखसंमिते । चन्द्रर्क्षे रवियोगाः स्युर्दोषसंघविनाशकाः ॥ २७ ॥ अन्वयः- (श्लोकक्रमेण) सुगमः ॥ २७ ॥ सूर्य जिस नक्षत्र में हो उस नक्षत्र से वर्तमान चन्द्र नक्षत्र चौथा, नवाँ, छठा, दशवाँ, तेरहवाँ, बीसवाँ हो तो रवियोग होता है । यह सम्पूर्ण दोषों का नाश करनेवाला है ॥ २७ ॥ सर्वार्थसिद्धियोग सूर्येऽर्क्रमूलोत्तरपुष्यदात्रं चन्द्रे श्रुतिब्राह्मशशोज्यमैत्रम् । भौमेऽश्व्यहिर्बुध्न्य कृशानुसार्पं ज्ञे ब्राह्ममैत्रार्ककृशानुचान्द्रम् ॥ २८ ॥ जीवेऽन्त्यमैत्राश्व्यदितीज्यधिष्ण्यं शुक्रेऽन्त्यमैत्राश्व्यदितिश्चवोभम् । शनौ श्रुतिब्राह्मसमीरभानि सर्वार्थसिद्धयै कथितानि पूर्वैः ॥ २९ ॥ अन्वयः- (श्लोकक्रमेण) पूर्वैः (एतानि) सर्वार्थसिद्धयै कथितानि ॥ २८-२९ ॥ रविवार को हस्त, मूल, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़, उत्तराभाद्रपद, पुष्य, अश्विनी; सोमवार को श्रवण, रोहिणी, मृगशिरा, पुष्य, अनुराधा; मंगल को अश्विनी, उत्तराभाद्रपद, कृत्तिका, आश्लेषा; बुधवार को रोहिणी, अनुराधा, हस्त, कृत्तिका, मृगशिरा; बृहस्पति को रेवती, अनुराधा, अश्विनी, पुनर्वसु, पुष्य; शुक्रवार को रेवती, अनुराधा, अश्विनी, पुनर्वसु, श्रवण; शनैश्चर को श्रवण, रोहिणी और स्वाती हो तो सर्वार्थसिद्धि योग होता है । इस योग में जो कार्य किया जाता है वह सिद्ध होता है ॥ २९ ॥