मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
DevanagariHindipublished207 पृष्ठ
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१४ मुहूर्तचिन्तामणि सर्वार्थसिद्धियोगचक्र
| रवि | सोम | मंगल | बुध | बृहस्पति | शुक्र | शनैश्चर |
|---|---|---|---|---|---|---|
| हस्त | श्रवण | अश्विनी | रोहिणी | रेवती | रेवती | श्रवण |
| मूल | रोहिणी | उ०भाद्रपद | अनुराधा | अनुराधा | अनुराधा | रोहिणी |
| उ० ३ | मृगशिरा | कृत्तिका | हस्त | अश्विनी | अश्विनी | स्वाती |
| पुष्य | पुष्य | आश्लेषा | कृत्तिका | पुनर्वसु | पुनर्वसु | |
| अश्विनी | अनुराधा | मृगशिरा | पुष्य | श्रवण | ||
| उत्पातादि योगचतुष्टय | ||||||
| द्वीशात्तोयाद्द्वासवात्पौष्णभाच्च ब्राह्मात्पुष्यादर्यमर्क्षाच्चतुर्भिः । | ||||||
| स्यादुत्पातो मृत्युकाणौ च सिद्धिर्वारैरेऽर्काद्यैतत्फलं नामतुल्यम् ॥ ३० ॥ | ||||||
| अन्वयः—अर्काद्ये वारे द्वीशात्, तोयात्, वासवात्, पौष्णभात्, ब्राह्मात्, पुष्यात्, | ||||||
| अर्यमर्क्षात्, चतुर्भिः उत्पातः स्यात् मृत्युकाणौ (भवेताम्) सिद्धिः स्यात्, तत्फलं | ||||||
| नामतुल्यं (ज्ञेयम्) ॥ ३० ॥ | ||||||
| रविवारादि सात दिनों में क्रम से विशाखा, पूर्वाषाढ़, धनिष्ठा, रेवती, | ||||||
| रोहिणी, पुष्य, उत्तराफाल्गुनी इन नक्षत्रों से चार-चार नक्षत्र उत्पात, | ||||||
| मृत्यु, काण, सिद्धि ये चार योग होते हैं अर्थात् रविवार को विशाखा | ||||||
| उत्पात, अनुराधा मृत्यु, ज्येष्ठा काण, मूल सिद्धियोग; सोमवार को पूर्वा- | ||||||
| षाढ़ उत्पात, उत्तराषाढ़ मृत्यु, अभिजित् काण, श्रवण सिद्धियोग; मंगल | ||||||
| को धनिष्ठा उत्पात, शतभिष मृत्यु, पूर्वाभाद्रपद काण, उत्तराभाद्रपद सिद्धि- | ||||||
| योग; बुधवार को रेवती उत्पात, अश्विनी मृत्यु, भरणी काण, कृत्तिका | ||||||
| सिद्धियोग; बृहस्पति को रोहिणी उत्पात, मृगशिरा मृत्यु, आर्द्रा काण, | ||||||
| पुनर्वसु सिद्धियोग; शुक्रवार को पुष्य उत्पात, आश्लेषा मृत्यु, मघा काण, | ||||||
| पूर्वाफाल्गुनी सिद्धियोग; शनैश्चर को उत्तराफाल्गुनी उत्पात, हस्त मृत्यु, | ||||||
| चित्रा काण, स्वाती सिद्धियोग होता है । इन चारों योगों का फल भी इनके | ||||||
| नाम के सदृश ही होता है ॥ ३० ॥ | ||||||
| उत्पातादियोगचतुष्टयचक्र | ||||||
| योग | रवि | सोम | मंगल | बुधवार | बृहस्पति | शुक्र |
| :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- | :--- |
| उत्पात | विशाखा | पूर्वाषाढ़ | धनिष्ठा | रेवती | रोहिणी | पुष्य |
| मृत्यु | अनुराधा | उत्तराषाढ़ | शतभिष | अश्विनी | मृगशिरा | आश्लेषा |
| काण | ज्येष्ठा | अभिजित् | पूर्वाभा० | भरणी | आर्द्रा | मघा |
| सिद्धि | मूल | श्रवण | उ०भा० | कृत्तिका | पुनर्वसु | पूर्वाफा० |