भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

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१४ मुहूर्तचिन्तामणि सर्वार्थसिद्धियोगचक्र

रविसोममंगलबुधबृहस्पतिशुक्रशनैश्चर
हस्तश्रवणअश्विनीरोहिणीरेवतीरेवतीश्रवण
मूलरोहिणीउ०भाद्रपदअनुराधाअनुराधाअनुराधारोहिणी
उ० ३मृगशिराकृत्तिकाहस्तअश्विनीअश्विनीस्वाती
पुष्यपुष्यआश्लेषाकृत्तिकापुनर्वसुपुनर्वसु
अश्विनीअनुराधामृगशिरापुष्यश्रवण
उत्पातादि योगचतुष्टय
द्वीशात्तोयाद्द्वासवात्पौष्णभाच्च ब्राह्मात्पुष्यादर्यमर्क्षाच्चतुर्भिः ।
स्यादुत्पातो मृत्युकाणौ च सिद्धिर्वारैरेऽर्काद्यैतत्फलं नामतुल्यम् ॥ ३० ॥
अन्वयः—अर्काद्ये वारे द्वीशात्, तोयात्, वासवात्, पौष्णभात्, ब्राह्मात्, पुष्यात्,
अर्यमर्क्षात्, चतुर्भिः उत्पातः स्यात् मृत्युकाणौ (भवेताम्) सिद्धिः स्यात्, तत्फलं
नामतुल्यं (ज्ञेयम्) ॥ ३० ॥
रविवारादि सात दिनों में क्रम से विशाखा, पूर्वाषाढ़, धनिष्ठा, रेवती,
रोहिणी, पुष्य, उत्तराफाल्गुनी इन नक्षत्रों से चार-चार नक्षत्र उत्पात,
मृत्यु, काण, सिद्धि ये चार योग होते हैं अर्थात् रविवार को विशाखा
उत्पात, अनुराधा मृत्यु, ज्येष्ठा काण, मूल सिद्धियोग; सोमवार को पूर्वा-
षाढ़ उत्पात, उत्तराषाढ़ मृत्यु, अभिजित् काण, श्रवण सिद्धियोग; मंगल
को धनिष्ठा उत्पात, शतभिष मृत्यु, पूर्वाभाद्रपद काण, उत्तराभाद्रपद सिद्धि-
योग; बुधवार को रेवती उत्पात, अश्विनी मृत्यु, भरणी काण, कृत्तिका
सिद्धियोग; बृहस्पति को रोहिणी उत्पात, मृगशिरा मृत्यु, आर्द्रा काण,
पुनर्वसु सिद्धियोग; शुक्रवार को पुष्य उत्पात, आश्लेषा मृत्यु, मघा काण,
पूर्वाफाल्गुनी सिद्धियोग; शनैश्चर को उत्तराफाल्गुनी उत्पात, हस्त मृत्यु,
चित्रा काण, स्वाती सिद्धियोग होता है । इन चारों योगों का फल भी इनके
नाम के सदृश ही होता है ॥ ३० ॥
उत्पातादियोगचतुष्टयचक्र
योगरविसोममंगलबुधवारबृहस्पतिशुक्र
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उत्पातविशाखापूर्वाषाढ़धनिष्ठारेवतीरोहिणीपुष्य
मृत्युअनुराधाउत्तराषाढ़शतभिषअश्विनीमृगशिराआश्लेषा
काणज्येष्ठाअभिजित्पूर्वाभा०भरणीआर्द्रामघा
सिद्धिमूलश्रवणउ०भा०कृत्तिकापुनर्वसुपूर्वाफा०