मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशुभाशुभप्रकरण २३
अन्वयः—सिंहे सिंहलवे गुरौ (सति) विवाहः नेष्टः, अथ गोदोत्तरतः भागीरथी याम्यतटं (यावत्) दोषः । अन्यत्र देशे न (दोषः) । मेषे तपने [सूर्ये] अपि (दोषः न) ॥ ४६ ॥ सिंहराशि में सिंह ही के नवांश में बृहस्पति स्थित हो तो विवाह इष्ट नहीं है, अर्थात् सिंह के नवांश को छोड़कर सिंह राशि के शेष अंशों में बृहस्पति के रहते विवाह करने का निषेध नहीं है । अथवा सिंह राशि में बृहस्पति के रहते गोदावरी नदी के उत्तर किनारे से लेकर गङ्गा के दक्षिण किनारे तक के देशों में विवाहादि शुभ कार्य करने में दोष है, अन्य देशों में नहीं । अथवा सिंह राशि में बृहस्पति के रहते भी मेष में सूर्य स्थित हो तो विवाहादि शुभकर्म करने में दोष नहीं है ॥ ४९ ॥ सिंहस्थ गुरुदोष और उसका परिहार मघादिपञ्चपादेषु गुरुः सर्वत्र निन्दितः । गङ्गागोदान्तरं हित्वा शेषाङ्घ्रिषु न दोषकृत् ॥ ५० ॥ मेषेऽर्के सन् व्रतोद्वाहौ गङ्गागोदान्तरेऽपि च । सर्वः सिंहगुरुर्वर्ज्यः कलिङ्गे गौडगुर्जरे ॥ ५१ ॥ अन्वयः—मघादिपञ्चपादेषु गुरुः सर्वत्र निन्दितः । शेषाङ्घ्रिषु गङ्गागोदान्तरं हित्वा दोषकृत् न (भवति) । मेषेऽर्के गंगागोदान्तरेऽपि सद्र्वतोद्वाहौ (भवेताम्) । कलिङ्गे गौडगुर्जरे (देशे) सर्वः सिंहगुरुः वर्ज्यः ॥ ५०-५१ ॥ मघा नक्षत्र के प्रथम चरण से लेकर पूर्वाफाल्गुनी के प्रथमचरणपर्यन्त पाँच चरणों में बृहस्पति सब देशों में निन्दित है । शेष चरणों में अर्थात् पूर्वाफाल्गुनी के दूसरे चरण से लेकर उत्तराफाल्गुनी के प्रथमचरणपर्यन्त चार चरणों में गङ्गा और गोदावरी के मध्य में बसे हुए देशों को छोड़कर अन्य देशों में दोषकारक नहीं है । यदि सूर्य मेष में हो और बृहस्पति सिंह राशि में हो तो गङ्गा और गोदावरी के मध्यवर्ती देशों में भी यज्ञोपवीत और विवाह शुभ हैं । परन्तु कलिङ्ग, गौड़, गुर्जर इन देशों में सम्पूर्ण सिंहस्थ बृहस्पति वर्जनीय है ॥ ५०-५१ ॥ मकर में स्थित बृहस्पति के परिहार रेवापूर्वे गण्डकीपश्चिमे च शोणस्योदग्दक्षिणे नीच इज्यः । वर्ज्यो नायं कौङ्कणे मागधे च गौडे सिन्धौ वर्जनीयः शुभेषु ॥ ५२ ॥