भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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४२ मुहूर्त्तचिन्तामणि पीटना अथवा माड़ना शुभ है। विशाखा, पूर्वाभाद्रपद, मूल, रोहिणी, शतभिष और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में; शनैश्चर और मंगल को छोड़ अन्य दिनों में; खेतों में धान का लगाना शुभ है ॥ ३२ ॥ धान्यस्थिति और धान्यवृद्धि का मुहूर्त्त मिश्रोग्ररौद्रभुजगेन्द्रविभिन्नभेषु कर्कजतौलिरहिते च तनौ शुभाहे । धान्यस्थितिः शुभकरी गदिता ध्रुवेज्य- द्वीशेन्द्रदस्रचरभेषु च धान्यवृद्धिः ॥ ३३ ॥ अन्वयः-मिश्रोग्ररौद्रभुजगेन्द्रविभिन्नभेषु च (तथा) कर्कजतौलिरहिते तनौ, शुभाहे धान्यस्थितिः शुभकरी गदिता। च [पुनः] ध्रुवेज्यद्वीशेन्द्रदस्रचरभेषु धान्यवृद्धिः शुभकरी गदिता ॥ ३३ ॥ विशाखा, कृत्तिका, तीनों पूर्वा, भरणी, मघा, आर्द्रा, आश्लेषा और ज्येष्ठा को छोड़ अन्य नक्षत्रों में; कर्क, मेष और तुला को छोड़ अन्य लग्नों में; सोम, बुध, शुक्र और बृहस्पति के दिन में धान्यस्थिति अर्थात् अन्न का रखना शुभ होता है। तीनों उत्तरा, रोहिणी, पुष्य, विशाखा, ज्येष्ठा, अश्विनी, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष, पुनर्वसु और स्वाती नक्षत्र में धान्यवृद्धि अर्थात् डेढ़ी और सवाई पर अनाज देना शुभ है ॥ ३३ ॥ शान्तिक और पौष्टिक मुहूर्त्त क्षिप्रध्रुवान्त्यचरमैत्रमघासु शस्तं स्याच्छान्तिकं च सह मङ्गलपौष्टिकाभ्याम् । खेऽर्के विधौ सुखगते तनुगे गुरौ नो मौढ्यादिदुष्टसमये शुभदं निमित्ते ॥ ३४ ॥ अन्वयः-क्षिप्रध्रुवान्त्यचरमैत्रमघासु अर्के खे, विधौ सुखगते, गुरौ तनुगे मङ्गल- पौष्टिकाभ्याम् सह शान्तिकं शस्तं स्यात् । मौढ्यादिदुष्टसमये नो शुभदं (तथा) निमित्ते [केत्वाद्युत्पातदर्शने सति] शुभदं (स्यात्) ॥ ३४ ॥ अश्विनी, पुष्य, हस्त, तीनों उत्तरा, रोहिणी, रेवती, श्रवण, धनिष्ठा शतभिष, पुनर्वसु, स्वाती, अनुराधा और मघा नक्षत्र में; रिक्ता, अष्टमी, पूर्णमासी, अमावस, सूर्य-संक्रान्ति, रविवार, मङ्गल, शनैश्चर को छोड़ अन्य तिथियों और दिवसों में; लग्न से दशवें स्थान में सूर्य, चौथे स्थान में