भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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नक्षत्रप्रकरण ५१ अन्वयः—शुचिप्रौष्ठपदेषमाघे मूलं स्वर्गे (तिष्ठति) । नभः कार्त्तिकचैत्रपौषे मूलं भूमौ (तिष्ठति) । तु (पुनः) तपस्यमार्गवैशाखशुक्रेषु मूलं अधस्तात् (तिष्ठति) । मूलं (यत्र) तिष्ठति तत्र अशुभं (ज्ञेयम्) ॥ ५५ ॥ आषाढ़, भाद्रपद, आश्विन और माघ में स्वर्ग में; श्रावण, कार्त्तिक, चैत्र और पौष में भूमि में; और फाल्गुन, ज्येष्ठ, अगहन और वैशाख में पाताललोक में मूल का निवास होता है । जहाँ मूल का वास होता है वहाँ उसका अशुभ होता है ॥ ५५ ॥ गण्डान्तादि में जन्मे हुए का अरिष्ट और उसका परिहार गण्डान्तेन्द्रभशूलपातपरिघव्याघातगण्डावमे संक्रान्तिव्यतिपातवैधृतिसिनीवालीकुहूदर्शके । वज्रे कृष्णचतुर्दशीषु यमघण्टे दग्धयोरमृतौ विष्टौ सोदरभे जनिर्न पितृभे शस्ता शुभा शान्तितः ॥ ५६ ॥ अन्वयः—[अत्रान्वयः श्लोकक्रमेणैवान्ते] जनिः न शस्ता, शान्तितः शुभा (भवति) ॥ ५६ ॥ गण्डान्त, ज्येष्ठा, शूलयोग, पात अर्थात् गणित से सिद्ध होनेवाला व्यतीपात, परिघ, व्याघात, गण्डयोग, अवम अर्थात् तिथिक्षय, संक्रान्ति, व्यतीपात, वैधृतियोग, सिनीवाली अर्थात् चतुर्दशीयुक्त अमावास्या, कुहू अर्थात् परीवासंयुक्त अमावास्या, दर्श अर्थात् सूर्य और चन्द्रमा का समागम जिसमें हो वह तिथि, वज्रयोग, कृष्णपक्ष की चतुर्दशी, यमघंट, दग्धयोग, मृत्युयोग, भद्रा, भाई-बहिन का जन्म नक्षत्र, माता-पिता का जन्मनक्षत्र, तथा चन्द्रमा और सूर्य के ग्रहणकाल में यदि किसी का जन्म हो, तीन कन्याओं के बाद पुत्र का जन्म और तीन पुत्रों के बाद कन्या का जन्म हो तो अशुभ होता है । परन्तु उसकी शान्ति करने से शुभ होता है ॥ ५६ ॥ अश्विन्यादि नक्षत्रों के तारों की संख्या त्रित्र्यङ्गपञ्चाग्निकुवेदवह्नयः शरेषुनेत्राशिवशरेन्दुभूकृताः । वेदाग्निरुद्राशिवयमाग्निवह्नयोऽब्धयः शतंद्विद्विरदा भतारकाः ॥ ५७ ॥ अन्वयः—[श्लोकक्रमेण] (एताः) भतारकाः [क्रमेण ज्ञेया] ॥ ५७ ॥ अश्विनी का स्वरूप तीन ताराओं का, भरणी का तीन ताराओं का, कृत्तिका का छः ताराओं का, रोहिणी का पाँच ताराओं का, मृगशिरा का