मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
DevanagariHindipublished207 पृष्ठ
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| विषय | पृष्ठ | विषय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| सर्वांक योग | १७६ | शुभलग्न | १८६ |
| महाडल और भ्रमण योग | १७६ | दिशाओं के स्वामी | १८७ |
| हिम्बराख्य योग | १७७ | दिक्स्वामिचक्र | १८७ |
| घातचन्द्र योग | १७७ | दिग्गीश कहने का प्रयोजन | १८७ |
| घातचन्द्रचक्र | १७७ | लालाटिक योग | १८८ |
| घातक नक्षत्रपाद | १७७ | प्रास्थानिक यात्रायोग | १८८ |
| घातक नक्षत्रपादचक्र | १७८ | समयबल | १८६ |
| घातक तिथियाँ | १७८ | लग्नादि बारह भावों के नाम | १८६ |
| व्राततिथिचक्र | १७६ | यात्रा में ग्रहों का शुभाशुभ फल | १६० |
| घातक वार | १७६ | यात्रा के अधिकारी | १६० |
| घात वारचक्र | १७६ | योगयात्रा | १६० |
| घातक नक्षत्र | १७६ | यात्राकालिक योगादि | १६५ |
| घातनक्षत्रचक्र | १८० | विजयादशमी की प्रशंसा | १६६ |
| तिथियोगिनी | १८० | यात्रा में चित्तशुद्धि की प्रधानता | १६६ |
| योगिनीचक्र | १८० | यात्राप्रतिबन्धक कार्य | १६६ |
| घातक लग्न | १८० | यात्राविशेष का विचार | १६७ |
| घातक लग्नचक्र | १८१ | यात्रा में रिक्तनवमी दोष | १६७ |
| कालपाशयोग | १८१ | यात्राकाल में कर्तव्य विधि | १६८ |
| कालपाशचक्र | १८२ | नक्षत्रदोहद | १६८ |
| परिघदण्डदोष | १८२ | दिग्दोहद | १६६ |
| परिघदण्डचक्र | १८२ | वारदोहद | १६६ |
| आग्नेयादि कोणों की यात्रा तथा परिघदण्ड का अपवाद | १८३ | तिथिदोहद | १६६ |
| परिघदण्ड का अन्य अपवाद तथा केन्द्र आदि स्थानों में वक्री ग्रह का निषेध | १८३ | यात्रा का अन्य प्रकार | २०० |
| दिशाओं के वाहन | २०० | ||
| यात्रा करने का स्थान | २०० | ||
| प्रस्थानविधि | २०१ | ||
| अयनशुद्धि | १८३ | मतभेद से प्रस्थान कितनी दूर पर करना चाहिए | २०१ |
| सम्मुख शुक्रदोष | १८४ | प्रस्थान की स्थिति का प्रमाण तथा यात्रा में त्याज्य वस्तु | २०२ |
| वक्रनीचादिस्थित शुक्रदोष | १८४ | यात्रा के अन्य नियम | २०३ |
| कालविशेष में शुक्रदोषाभाव तथा अस्तादि विचार | १८५ | आवश्यक यात्रा में अकालवृष्टि की शान्ति | २०३ |
| लग्नविशेष का त्याग | १८५ | शुभ शकुन | २०४ |
| मीन और मीन के नवांश का फल तथा शुभलग्न | १८५ | अशुभ शकुन | २०४ |
| अन्य अनिष्ट लग्न | १८६ | अन्य शकुन | २०५ |
| अन्य शुभ लग्न | १८६ | वामभाग में शुभ शकुन | २०६ |
| सम्मुख तथा पृष्ठगत लग्न | १८६ |