मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ६ ) विषय पृष्ठ | विषय पृष्ठ लग्न का विंशोपक बल ... १४८ अग्न्याधानप्रकरण श्वश्रूवादि के सुख-दुःख जानने का लग्नशुद्धि ... १६२ उपाय ... १४८ अग्न्याधानकालिक लग्नवश से यज्ञ- संकरवर्णों के विवाह का मुहूर्त ... १४६ कारक योग ... १६२ गान्धर्वादि विवाह में और त्रिपदी- राजाभिषेकप्रकरण चक्र में नक्षत्रशुद्धि ... १४६ नक्षत्र तथा लग्नशुद्धि ... १६३ सूर्य के नक्षत्र से अशुभ और शुभ राजाभिषेक काल में ग्रहस्थिति फल ... १६३ नक्षत्र ... १५० सम्पत्ति तथा पृथ्वीस्थिति ये दो विवाह से पूर्व होनेवाले कार्यों का योग ... १६४ मुहूर्त ... १५० यात्राप्रकरण वेदी के लक्षण तथा मंडप का प्रश्नकालिक शुभयात्रा योग ... १६५ उद्वासन ... १५० प्रश्नकालिक अशुभयात्रा योग ... १६६ मंडप के खम्भ गाड़ने का मुहूर्त ... १५१ प्रश्नद्वारा यात्रा की दिशा का स्तम्भचक्र ... १५१ निर्णय ... १६६ गोधूलिप्रशंसा ... १५१ मासभेद से यात्रा के शुभाशुभ भेद समय-भेद से गोधूलिकाल ... १५२ और तारा ... १६७ गोधूलि-समय में त्याज्य दोष ... १५२ यात्रा में निषिद्ध तिथि और विहित सूर्य की स्पष्टगति ... १५३ तिथि ... १६७ सूर्य स्पष्ट करने की रीति ... १५३ वांरशूल और नक्षत्रशूल ... १६८ लग्नघटिका साधनार्थ लग्नभुक्तांश- कालविशेष में विशेष नक्षत्रों का साधन ... १५४ निषेध ... १६८ लग्न और सूर्य से इष्टकालसाधन ... १५४ यात्रा में मध्यम नक्षत्र तथा कई लखनऊ का लग्नमान ... १५५ निषिद्ध नक्षत्रों की त्याज्य घटी ... १६६ इष्टकाल बनाने की विशेष रीति ... १५५ अन्य मत से त्याज्य घटी ... १६६ शुभ कार्यों में अवश्य त्यागने योग्य •नक्षत्रों की जीवपक्षादि संज्ञा ... १६६ दोष ... १५६ जीवपक्षादि संज्ञा चक्र ... १७० कन्या आदि के तेल आदि लगाने जीवपक्षादि का विशेष फल ... १७० की संख्या ... १५८ युद्धयात्रा के उपयोगी कुलाकुल वधूप्रवेश प्रकरण संज्ञक तिथि, वार और नक्षत्र ... १७१ वधूप्रवेश का मुहूर्त ... १५६ पन्थाराहु का विचार ... १७२ विवाह के बाद प्रथम वर्ष के महीनों पन्थाराहुचक्र ... १७३ में स्वामी के घर में स्त्री के रहने पन्थाराहुचक्रफल ... १७३ का फल ... १५६ पौषादि मासों की परिवादि तिथियों द्विरागमन प्रकरण में पूर्वादि दिशाओं की यात्रा का सम्मुख और दक्षिण शुक्र का दोष ... १६० शुभाशुभ फल ... १७३ शुक्रदोष का परिहार ... १६१ तिथिचक्र ... १७५