भारतकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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संस्कारप्रकरण ८१ अन्वयः-दन्तार्कभूपधृतिदिङ्‌मितवासरे, शुभे वारे, मृदुलघुध्रुवभैः (भैःनक्षत्रैः) शिशोः दोलाधिरूढिः स्यात् । अथ चतुर्थमासे वा अर्कमिते अह्नि गमोक्तसमये शिशोः निष्क्रमणं (शुभं) स्यात् ॥ १५ ॥ जन्मदिन से बत्तीसवें, बारहवें, सोलहवें, अठारहवें वा दशवें दिन; चन्द्र, बुध, बृहस्पति वा शुक्रवार और मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, हस्त, अश्विनी, पुष्य, अभिजित्, तीनों उत्तरा वा रोहिणी नक्षत्र में पहिले पहिल बालकों को झुलुआ पर चढ़ाना शुभ होता है । अब शिशुनिष्क्रमण- मुहूर्त्त कहते हैं । जन्म से चौथे मास में और यात्रा में कहे हुए तिथि, वार, नक्षत्र और लग्न में पहिले पहिल बालक को घर से बाहर निकालना शुभ होता है, अथवा जन्मदिन से बारहवें दिन यात्रोक्त समय में शुभ होता है ॥ १५ ॥ जलपूजामुहूर्त्त कवीज्यास्तचैत्राधिमासे न पौषे जलं पूजयेत्सूतिका मासपूर्तौ । बुधन्द्रीज्यवारे विरिक्ते तिथौ हि श्रुतीज्यादितीन्द्रर्कनैर्ऋत्यमैत्रैः ॥ १६ ॥ अन्वयः—कवीज्यास्तचैत्राधिमासे, पौषे मासे, मासपूर्तौ (अपि) सूतिका जलं न पूजयेत् । बुधेन्द्रीज्यवारे विरिक्ते तिथौ श्रुतीज्यादितीन्द्रर्कनैर्ऋत्यमैत्रैः जलं पूजयेत् ॥ १६ ॥ बृहस्पति वा शुक्र के अस्त में तथा चैत्र, पौष, वा मलमास में सूतिका जल की पूजा न करे और बुधवार, सोमवार, बृहस्पतिवार में; चौथि, नवमी, चतुर्दशी तिथि को छोड़ अन्य तिथियों में; श्रवण, पुष्य, पुनर्वसु, मृगशिरा, हस्त, मूल, अनुराधा नक्षत्र में और पहिले महीने की समाप्ति में सूतिका जल की पूजा करे ॥ १६ ॥ अन्नप्राशन मुहूर्त्त रिक्तानन्दाष्टदर्शं हरिदिवसमथो सौरिभौमार्कवाराँ- ल्लग्नं जन्मर्क्षलग्नाष्टमगृहलवगं मीनमेषालिकं च । हित्वा षष्ठात्समे मास्यथ हि मृगदृशां पञ्चमादोजमासे नक्षत्रैः स्यात्स्थिराख्यैः समृदुलघुचरैर्बालकान्नाशनं सत् ॥ १७ ॥ अन्वयः—रिक्तानन्दाष्टदर्शं, हरिदिवसं, सौरिभौमार्कवारान्, जन्मर्क्षलग्नाष्टमगृह- लवगं लग्नं, मीनमेषालिकं लग्नं (एतत् सर्वं) हित्वा, षष्ठात् समे मासि अथ हि मृगदृशां