मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसंस्कारप्रकरण ८३ अन्वयः—क्षीणेन्दुपूर्णचन्द्रेज्यज्ञभौमार्कार्किकिभार्गवैः ग्रहैः त्रिकोणव्ययकेन्द्राष्टस्थितैः (क्रमेण) भिक्षाशी, यज्ञकृत्, दीर्घजीवी, ज्ञानी, पित्तरुक्, कुष्ठी च अन्नक्लेशवातव्या- धिमान्, भोगभाग्, इति उक्तं फलं ज्ञेयम् ॥ १६-२० ॥ जिस लग्न में अन्नप्राशन इष्ट हो उससे नवें, पाँचवें, बारहवें, पहिले, चौथे, सातवें वा आठवें स्थान में यदि क्षीण चन्द्रमा स्थित हो तो वह बालक भीख माँग कर जीविका करता है; पूर्णचन्द्रमा स्थित हो तो यज्ञ करता है; बृहस्पति स्थित हो तो दीर्घायु होता है; बुध स्थित हो तो ज्ञानी; मंगल स्थित हो तो पित्तरोगी; सूर्य स्थित हो तो कुष्ठरोगी; शनैश्चर, राहु वा केतु स्थित हों तो अन्न का क्लेश और वातरोगी; और शुक्र स्थित हो तो वह बालक भोगी होता है ॥ १९-२० ॥ बालकों को भूमि में बैठाने का मुहूर्त पृथ्वीं वराहमभिपूज्य कुजे विशुद्धे ऽरिक्ते तिथौ व्रजति पञ्चममासि बालम् । बद्ध्वा शुभेऽह्नि कटिसूत्रमथ ध्रुवेन्दु- ज्येष्ठर्क्षमित्रलघुभैरुपवेशयेत्कौ ॥ २१ ॥ अन्वयः—पृथ्वी वराहं अभिपूज्य, कुजे विशुद्धे, अरिक्ते तिथौ, पञ्चममासि व्रजति, शुभेऽह्नि, ज्येष्ठर्क्षमित्रलघुभैः, कटिसूत्रं बद्ध्वा वालं कौ [पृथिव्यां] उपवेशयेत् ॥ २१ ॥ मङ्गल के बली रहते; जन्म से पाँचवें महीने में और चौथि, नवमी, चतुर्दशी को छोड़ अन्य तिथियों में; तीनों उत्तरा, रोहिणी, मृगशिरा, ज्येष्ठा, अनुराधा, हस्त, अश्विनी वा पुष्य नक्षत्र में; पृथ्वी और वराह की पूजा करके कटिसूत्र बाँधकर बालक को भूमि में बैठावे ॥ २१ ॥ बालक की जीविका-परीक्षा तस्मिन्काले स्थापयेत्तत्पुरस्ताद्वस्त्रं शस्त्रं पुस्तकं लेखनीं च । स्वर्णं रौप्यं यच्च गृह्णाति बालस्तैराजीवैस्तस्य वृत्तिः प्रदिष्टा ॥ २२ ॥ अन्वयः—तस्मिन् काले तत्पुरस्तात् वस्त्रं शस्त्रं पुस्तकं लेखनीं स्वर्णं रौप्यं च स्थापयेत् । बालः यत् गृह्णाति तैः आजीवैः तस्य वृत्तिः प्रदिष्टा ॥ २२ ॥ बालक को भूमि में बैठाकर उसके आगे वस्त्र, शस्त्र, पुस्तक, लेखनी, सुवर्ण और चाँदी धरे । वह बालक पहिले जिस वस्तु को उठावे उसी वस्तु के द्वारा उसकी जीविका पण्डितों ने कही है ॥ २२ ॥