मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
पृष्ठ 93, कुल 207 में से
संदर्भ में पढ़ें८४ मुहूर्तचिन्तामणि ताम्बूल-भक्षण-मुहूर्त्त वारे भौमार्किहीने ध्रुवमृदुलघुभैर्विष्णुमूलादितीन्द्र- स्वातीवस्वभ्युपेतैर्मिथुनमृगसुताकुम्भगोमीनलग्ने । सौम्यैः केन्द्रत्रिकोणैरशुभगगनगैः शत्रुलाभत्रिसंस्थै- स्ताम्बूलं सार्द्धमासद्वयमितसमये प्रोक्तमन्नाशने वा ॥ २३ ॥ अन्वयः—भौमार्किहीने वारे ध्रुवमृदुलघुभैः विष्णुमूलादितीन्द्रस्वातीवस्वभ्युपेतैः, मिथुनमृगसुताकुम्भगोमीनलग्ने, सौम्यैः केन्द्रत्रिकोणैः, अशुभगगनगैः शत्रुलाभत्रिसंस्थैः, सार्द्धमासद्वयमितसमये वा अन्नाशने ताम्बूलं प्रोक्तम् ॥ २३ ॥ मंगल और शनैश्चर को छोड़ अन्य दिनों में; तीनों उत्तरा, रोहिणी, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, हस्त, अश्विनी, पुष्य, श्रवण, मूल, पुनर्वसु, ज्येष्ठा, स्वाती वा धनिष्ठा नक्षत्र में; मिथुन, मकर, कन्या, कुम्भ, वृष, मीन लग्न में; चौथे, सातवें, दशवें, पाँचवें, नवें स्थान में और लग्न में शुभ ग्रहों के रहते; छठे, गेरहवें और तीसरे स्थान में पापग्रहों के रहते; जन्म से अढ़ाई महीने पर अथवा अन्नप्राशनमुहूर्त्त में बालक का ताम्बूलभक्षण शुभ होता है ॥ २३ ॥ कर्णवेध-मुहूर्त्त हित्वैतांश्चैत्रपौषावमहरिशयनं जन्ममासं च रिक्तां युग्माब्दं जन्मतारामृतुमुनिवसुभिः संमिते मास्यथो वा । जन्माहात्सूर्यभूपैः परिमितदिवसे ज्ञेज्यशुक्रेन्दुवारे ऽथोजाब्दे विष्णुयुग्मादितिमृदुलघुभैः कर्णवेधः प्रशस्तः ॥ २४ ॥ अन्वयः—चैत्रपौषावमहरिशयनं, जन्ममासं, रिक्तां च युग्माब्दं, जन्मतारां, एतान् हित्वा, ऋतुमुनिवसुभिः सम्मिते मासि अथो वा जन्माहात् सूर्यभूपैः परिमितदिवसे, ज्ञेज्यशुक्रेन्दुवारे, अथ ओजाब्दे, विष्णुयुग्मादितिमृदुलघुभैः, कर्णवेधः प्रशस्तः ॥ २४ ॥ चैत्र, पौष, तिथिक्षय, हरिशयन अर्थात् आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्त्तिक शुक्ल एकादशी तक; जन्ममास अर्थात् जन्मदिन से तीस दिन पर्यन्त, रिक्ता तिथि, सम वर्ष और जन्मतारा को छोड़कर जन्म से छठे, सातवें, आठवें महीने में, अथवा बारहवें या सोलहवें दिन, बुधवार, बृहस्पति, शुक्र, सोमवार में; और विषम वर्ष में; और श्रवण, धनिष्ठा, पुनर्वसु, मृगशिरा, रेवती, चित्रा, अनुराधा, हस्त, अश्विनी और पुष्य नक्षत्र में बालक का कर्ण- वेध शुभ होता है ॥ २४ ॥