मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुकुन्दमाल ११५ भगवन्मन्त्रमु सर्वैश्वर्यमुल निच्चुनदि. प्रति वारिकिनि शरीरसौ- ख्यमु लेकयो, आलुबिड्डलु मोदलगुवारि वलननो, विद्य मोदलगुनवि लेवनियो येदेनि ओक व्यसन मुण्डकमानदु. व्यसनमुल ननुभविञ्चु चुन्नप्पुडु पामुचेत कऱुवबडिन ट्लुण्डुनु. इट्टि वारिनि कापाडुमं- त्रमु, बाल्ययौवनादुल ननुभविञ्चुचु भार्यापुत्रुलु मोदलगु वारि विषयमुन संबन्धपडि चीकटियन्दु मुनिगि पोनीयक जन्ममुनु सफलमु चेयु मन्त्रमु. इट्टिदि श्रीकृष्ण मन्त्रमु. नालुका! दीनिनि जपिम्पुमु. २४ व्यामोहप्रशमौषधं मुनिमनोवृत्ति प्रवृत्त्यौषधं दैत्येन्द्रार्तिकरौषधं त्रिभुवनी संजीवनै कौषधम्, भक्त्यात्यन्तहितौषधं भवभय प्रध्वंसनै कौषधं श्रेयःप्राप्तिकरौषधं पिब मन श्रीकृष्ण दिव्यौषधम्. मनः=ओ मनसा! व्यामोहा=अनुरागमनेडु मूर्छनु, प्रशम=पोगोट्टुनट्टि, औषधं=मन्दुन्, मुनि=योगुलयोक्क, मनो- वृत्ति = मनोव्यापारमु योक्क, प्रवृत्ति = नडवडिकि, औषधं=मन्दुन्, दैत्येन्द्र=राक्षसुललो मेटुलकु, आर्तिकर= बाधनु गलुगजेयुनट्टि, औषधं=मन्दुन्, त्रिभुवनी=मुल्लोकमु- लनु, संजीवन=ब्रतिकिञ्चुनट्टि, 'एक औषधं=मुख्यमैन मन्दुन्, भक्त=सेवचेयुवारिकि, अत्यन्त=मिक्किलि, हित=मेलुनु गलुगजेयु नट्टि, औषधं=मन्दुन्, भव=संसारमुवलनि, भय=वेऱपुनु, प्रध्वं- सन=बोत्तिगा लेकुण्डजेयुनट्टि, 'एक औषधं=मुख्यमयिन मन्दुन्, श्रेयःप्राप्तिकरौषधं=मेलुनु कलुग जेयुनट्टि मन्दुन् अगु श्रीकृष्ण दिव्यौषधं=श्रीकृष्णुडनु श्लाघ्यमैन मन्दुन्, पिब=पानमु चेयुमु.