मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुकुन्दमाल 131 नालुक : एन्दुकु भगवन्नाममु नुच्चरिम्पु मनुचुन्नारु? कुल : एदि गोप्पदैयुण्डुनो दानिकंटेनु नाममु गोप्पदि. ब्रह्मा, शिवुडु, इन्द्रुडु मोदलगु वारि कंटेनु गोप्पगनुण्डु परमात्मनु वानि नाममु लेत्ति चेप्पनु. नालुक : अट्लु वानि तत्त्वमुनु देलिसि चेसिन नेमि लाभमु? कुल : अट्लु तेलिसिकॊनि अनुसंधिंचु पक्षमुन मधुरमुग नुण्डुनु. तेने लॊलुकु पण्ड्लवले नुण्डुनु. नालुक : इंत रुचिग नुण्डु पण्डु मनकु चेदुग नुण्डुने. कुल : पेद्दलकु, विद्वज्जनुलकु, ज्ञानुलकु रुचिग नुण्डुनु. नालुका! अट्टि भगवन्नाममुलनु चेप्पुमु. नारा यणु नेत्ति चेप्प नाममुल नुच्चरिम्पुमु. नीकु नमस्करिंचेदनु. कुलशेखरु लिटलु जिह्वेंद्रियमुन्नु निग्रहिंचि स्वाधीनमुन नुंचु कॊनवलयुननियु, दुष्टुनिकि मंचिमाटलतो बुद्धि चेप्पनट्लु नालुककु भगवन्नाममुनन्दु रुचि गलिगिंपवलेननियु, षड्रसमुलने अनुभविं चक भगवन्नाममुलनु अनुभविंपवलयु ननियु तेलियजेसिरि. 31 इदं शरीरं परिणामपेशलं पत त्यवश्यं श्लथसंधिजर्जरम्, कि मौषधैः क्लिश्यसि मूढ दुर्मते निरामयं कृष्णरसायनं पिब. इदं शरीरं=ई नशिंचेडु स्वभावमुगल देहमु, परि णाम पेशलं=मुदिमि मोदलगु मार्पुलु पॊन्दिनदै, श्लथ=वीडि नट्टि, संधि=कीळ्ळुगलदि गनुकने, जर्जरं=शिथिलमैनदि, अवश्यं=तप्प