मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१४२ मुकुन्दमाल अनु पेट्टेलो सकलशास्त्राडु लुन्नवनि पुरन्दरदासु चेप्पिरि. तिरुमं- त्रमुनन्दु नारायणुडु सकलवस्तुवुलकु स्थानमनियु, आ वस्तुवुलु आतనికి स्थान मनियु चेप्पबडिनदि. अन्तर्यामित्वमु, आधारत्वमु चेप्पबडिनदि. भूमि रापोऽनलो वायुः खं मनोबुद्धि रेव च, अहंकार इतीयं मे भिन्ना प्रकृति रष्टधा. अपरेय मित स्त्वन्यां प्रकृतिं विद्धि मे पराम्, जीवभूतां महाबाहो ययेदं धार्यते जगत्. भगवद्गीत, ७अध्यायमु ४,५श्लोकमु लन्दुवले अतडु सृष्टिंचुनु. अदियॊक गॊप्पकार्यमु काजालदु. मया तत मिदं सर्वं जग दव्यक्त मूर्तिना, मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थितः. अनु भगवद्गीत ९अध्या. ४श्लोकमुवले आ वस्तुवुलयन्दु निंडियुं- डुनु. नक्षत्रमुलु, सूर्यचंद्रुलु भगवंतुनि वलनने निलुचुचुन्नारु. स्वामि वासुदेवुडुग नुन्नाडु. अतडु सर्वमुनन्दु वसिंचुवाडु. तनयन्दु सर्वमुनु वसिंपजेयुवाडु. नारायण यनु नाममु मूलमु. वासुदेव यनु नाममु दानिकि व्याख्यानमुग नुन्नदि. नारदुडु ध्रुवुनिकि वासुदेव द्वादशाक्षरि मंत्रमु नुपदेशिं- चॆनु. वासुदेवु डनुटचे चॆड्डवस्तुवुलन्दुनु वसिंचुना? अन्निटिनि भरिंचवलदा अनिन ‘दिव्’ अनु धातुवुचेत अतडु लीलगा आ कार्य- मुनु चेयुनु. संकल्प मात्रमुन चेयुनु. चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्म विभागशः, तस्य कर्तार मपि मां विद्ध्यकर्तार मव्ययम्.