भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

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मुकुन्दमाल 145 अपि चेदसि पापेभ्यः सर्वेभ्यः पापकृत्तमः, सर्वं ज्ञानप्लवे नैव वृजिनं संतरिष्यसि. अनु भगवद्गीत 4 अध्या. 36 श्लोकमुवले पेद्दपापियैननु भयमु लेदु. प्रश्न : शत्रुवुलु सहाय संपन्नु लयिन नेट्लु? कुल : शिवुनि यॊद्द वरमुपडसि सकललोकमुल नाडिंचु चुंडिन नरकासुरुनिकि स्नेहितुडुनु, अयिदु तललु, पदिचेतुलुनु गलिगिन मुरासुरुनि चंपिनवा डतडु. प्रश्न : स्वामि मुसलि वाडयिपोयिन नेट्लु? कुल : अनंतु डतडु. प्रश्न : अतनिकि स्थल मुन्नदा? कुल : वैकुंठु डतडु. वैकुंठमुन्नदि. प्रश्न : एत्लु पिलुचुकॊनि पोगलडु? कुल : मुकुन्दु डतडु. प्रकृति बंधमुनु विडिपिंचि विरजा नदिलो स्नान माचरिंपजेसि तन यूरिकि पिलुचुकॊनि पोवुनु. अतडु कृष्णुडु. परिपूर्णानंद स्वरूपुडु. प्रश्न : मीमाट नम्मवलसिनदेना? प्रमाण मुन्नदा? कुल : गोविन्दु डतडु. सर्वस्य चाहं हृदि संनिविष्टो मत्त स्मृतिर् ज्ञान मपोहनं च, वेदैश्च सर्वै रहमेव वेद्यो वेदांतकृ द्वेदविदेव चाहम्. भगवद्गीत 15अध्या. 15श्लोकमट्लु वेदवेद्युडु. 11