मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें30 मुकुन्दमाल कावलयुननि कोरुकोनिन नतडेमि चेयुगलगुनु? अनगा मुकुन्दः-- अतडु ऐहिकसुखमु मात्रमेकाक मोक्षमु सङ्घत मिच्चुटकु समर्थुडु. मुकुन्दुडु कदा! मनकु मात्रमे गादु. मोक्षसाम्रा- ज्यमुनन्दतिकिनि दयचेयुनु. इट्टिवाडु सुखमुग नुण्डवलयुनु. मनःपूर्वकमुग जेप्पुवारु पलुमारु चेप्पुदुरु. अद्वितीय परमभो- ग्यवस्तुवगु स्वामियन्दु अतिप्रीतिचेत कुलशेखरुलु जयतु जयतु अनि अनेकपर्यायमूलु प्रयोगिञ्चिरि. 3 मुकुन्द मूर्ध्ना प्रणिपत्य याचे भवन्त मेकान्त मियन्त मर्थम्, अविस्मृति स्त्वच्चरणारविन्दे भवे भवे मेऽस्तु भवत्प्रसादात्. मुकुन्द=ओ मुकुन्दा!, मूर्ध्ना=शिरस्सुतो, प्रणिपत्य=दण्डममु समर्पिञ्चि, भवन्तम्=निन्नु, एकान्तम्=ओक्कटियैन, इयन्तम् अर्थम्= ई मात्रमु प्रयोजनमुनु, याचे=वेडुचुन्नानु=(अदि ई कार्यमे यनुटु), भवत्प्रसादात्= नीयनुग्रहमुवलन, त्वत्=नीयोक्क, चरण+अरविन्दे=कमलमुलनुबोलिन पादमुलन्दु, अविस्मृतिः=ज्ञाप- कम्, मे=नाकु, भवे भवे=प्रतिजन्ममन्दुन्, अस्तु=कलुगुगाक! ओ मुकुन्दा! निन्नु शिरमुतो सेविञ्चि नियतमुगा इन्तमा- त्रमे याचिञ्चुचुन्नानु. प्रतिजन्ममुनन्दुनु नी यनुग्रहमुचेत नी पादपद्ममुलनु मरवकुन्दुनु गाक! ओ मुकुन्दा! नीवु मोक्षमिच्चुवाडवनि नी नाममे चेप्प चुन्नदि. नीवु प्रकृतिबन्धमुनु विडिपिञ्चुनट्टि वाडवु. ए विषयमन्दु दैननु अधिकुडैयुण्डु वानि योद्द्कु इतरुडु वच्चेनेनि वाडु तनकड