भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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मुकुन्दमाला ३५ कुल : हे हरे! कुम्भीपाकं गुरुन्नारकम् अपनेतुमपि नाहं वन्दे. ओ हरी! कुम्भीपाकमनेडि घोरनरकमुनु पोगोट्टु कोఱ कुनु नेनु सेविम्पनेरनु. स्वामि : नरकमु पोगोट्टुकोनुटकु, मोक्षमु पोन्दुटकु कोरिक लेकुण्डिनयेडल वैहिक सौख्यमुकण्टॆनु हेच्चैन स्वर्गलो- कसुखमु कावलयुना? कुल : रम्याः मृदुतनुलताः रामाः नन्दने रन्तुमपि नाहं वन्दे-सुन्दरुलुनु, मृदुवयिन तीगवण्टि शरीरमुलुगल स्त्रीलतोड देवेन्द्रुनि युद्यानवनमुनन्दु क्रीडिञ्चुट कुनु नेनु सेविम्पनु. (ई श्लोकमुनकु वेఱर्धमु चॆप्पबडुचुन्नदि). स्वामि : स्वर्गमोक्ष नरकमुलु परलोकमुलु. आ लोकमुल विषय मुलनु गूर्चि कोरकुन्ननु इहलोकसुखमुलु वलदा? कुल : अ=अकारवाच्युडा! द्वन्द्वहेतोः=भार्याभर्तल चेरिकव लन गलगु द्वन्द्वसुखमुनुकुगानु नाहंवन्दे तव चरणयो र्द्वन्द्वं=नी चरणद्वयमुनु सेविम्पनेरनु. हरे=ओहरी! अप=ईश्वरान्तररहिता=अनगा अधिकुडा! नारकं=अनेक मनुजुलु सुखपडुनट्टि, कुम्भीपाकं=पात्र मुन चेयबडिन वण्टनु, गुरुमपि=अधिकमुगानैननु, न नेतुं=तीसिकोनुटकु सेविम्पनु. अनगा अनेकुलु सुखपडुनट्लु अधिकमुग वण्टलु कावलॆननि कोरनु; नन्द नेन=कुमारुनितो गूडि, रम्याः=सुन्दरुलु, मृदुतनु लताः=कोमलमैन तीगवण्टि मेनुुलगल, रामाः=स्त्रीलनु, न रन्तुमपि=अनुभविञ्चुटकु नमस्करिम्पनु. स्वामि : ऐहिकामुष्मिकमुलनु रॆण्टिनि वलदण्टिवि. एदियुनु अडुगनण्टिवि. मఱि नीकु कावलसिनदेदि?