भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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समर्थिञ्चलेदु. भावे भावे=प्रति तलम्पुनन्दुनु, हृदयभवने=मन स्पनेडि यिण्टियन्दु, भवन्तं=देवरवारिनि, भावयेयं=ध्यानिन्तुनु. शीतोष्णादि द्वन्द्व दुःखनिवृत्त्यर्थमु नी पादयुगळमु नाश्र यिञ्चलेदु. कुम्भीपाकादि दारुण नरकमुलनु तोलगिञ्चुटकै नमस्करिञ्चुवादनु गानु. मृदुवैन तीगवण्टि शरीरमुलुगल सौन्द र्यवतुलैन स्त्रीलतो इन्द्रुनि उद्यानवनमु नन्दु क्रीडिञ्चुटकु निन्नु गोलुचुवादनु गानु. (अयिन) तलम्पु तलम्पुनन्दुनु हृदय मनु भवनमुनन्दु निन्नु दलञ्चुटकु अवकाशमु गलुगवलयुननि कोरुचुन्नानु. स्वामि : मूडव श्लोकमुन शिरमुतो सेविञ्चि याचिञ्चुचुन्ना नण्टिवि. ए प्रयोजनमु नपेक्षिञ्चि यडुगुचुन्नाstandard/वो तेलुपवलयुनु. कुलशेखरुलु : अद्वन्द्वहेतोः. स्वामि! त्रैगुण्यविषया वेदा निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन, निर्द्वन्द्वो नित्यसत्त्वस्थो निर्योगक्षेम आत्मवान्. -- गीत. 2.45 ब्रह्मार्पणं ब्रह्महवि र्ब्रह्माग्नौ ब्रह्मणा हुतम्, ब्रह्मैव तेन गन्तव्यं ब्रह्मकर्मसमाधिना. -- गीत. 4.24 अनुनट्लु प्रकृतिगुणमुलनु, द्वन्द्वमुलनु तोलगिञ्चुकोनि ज्ञानियै मोक्षमुनु पोन्दवलयुननियु 'नाहं वन्दे तव चरणयोर्द्वं द्वम्'- नेनु नीपादयुगळमु सेविञ्चुट लेदु. स्वामि : नरकभयमु लेकुण्डुटनु अडुगुचुन्नावा? मञ्चिकोर कुन्ननु चेडुगु पोवलयुननि कोरवा?

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