भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

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मुकुन्दमाला ३३ स्वामी! आब्रह्मभुवना ल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन, मा मुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते. -- गीत. ८.१६ न्नट्लु मोक्षमु नडुगनु. ए जन्ममुनु, ए यवस्थनु पॊन्दिननु न्नु मऱवकुण्डवलयुनु. ऎन्तटि गॊप्प जन्ममैननु भगवन्तुनि ఱचिन यॆडल प्रयोजनमु लेदु. ऎन्त हीनजन्ममैननु भगवन्तुनि ఱवकुण्डिन चालुनु. अन्दुचेतने कुलशेखरुलु 'अविस्मृति' -- गवन्तुनि मऱवनि स्मृतिनि अडिगिरि. ४ नाहं वन्दे तवचरणयो र्द्वन्द्व मद्द्वन्द्वहेतोः कुम्भीपाकं गुरुमपि हरे नारकं नापनेतुम्, रम्या रामा मृदुतनुलता नन्दने नापि रन्तुं भावे भावे हृदयभवने भावयेयं भवन्तम्. हरे=ओ मुकुन्दा! अहं=नेनु, अद्वन्द्वहेतोः=चलि, वेडिमि, ःखमु, सुखमु अनु द्वन्द्वदुःखमुलु लेकुण्डुटकै, तव=देव गारियॊक्क, चरणयोः=पादमुलयॊक्क, द्वन्द्वं=जण्टनु, न न्दे=नमस्करिञ्चुवाडनुगानु. गुरुमपि=ओर्वरानिदैननु, कुम्भी कं= कुम्भीपाक मनु पेरुगल, नारकम्=नरकमुनु, अप तुम्=पोगॊट्टुटकै मीपादमुलकु नेनु दण्डमु समर्पिञ्च नु. मृदु=मॆत्तनि, तनुलताः=तीगलवण्टि देहमुलुगल, रम्याः= ౦दर्यवतुलैन, रामाः=स्त्रीलोतॊड, नन्दने=इन्द्रुनि युद्यानवनमु न्दु, रन्तुमपि=क्रीडिम्पवलेननियैननु मीपादमुलकु प्रणाममु ४