मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुकुन्दमाल 39 धर्मसाधन म्मनि यु चेप्पियुण्डुटचेत शरीरयात्रार्थमु धनमु काव- लसिनदे. आशापाशशतैर्बद्धाः कामक्रोधपरायणाः, ईहन्ते कामभोगार्थ मन्यायेनार्थसंचयान्. (अनु भगवद्गीत 16अध्या. 12श्लोकमुन द्रव्यमं दधिकाशगल वारु असुर स्वभावुलनि चेप्पबडिनदि. इत्यादि कारणमुलचेत कुलशेखसुलु धनमुनं दाशलेदनक धनराशियन्दु लेदनिरी.) स्वामि : कामोपभोगसुखमुलु अनुभवम्पवलदा? कुल : स्वामि! पूर्वश्लोकमुन स्वर्गमुनन्दुनु, ई लोकमुनं- दुनु सुखमु वलदंटिनि गदा? आ सुखमु लनुभविंचु टकु हेतुवगु कामोपभोगमुलन्दुनु ना किच्छलेदनि ई श्लोकमुन देलुपुचुन्नानु. (नास्था धर्मे न वसुनि- चये नैव कामोपभोगे यनि धर्मकाममुलकु नडुनु धनमुनु जेप्पियुण्डुटचेत, धनसाधनमगु धर्ममुनं- दुनु, धनसाध्यमगु काममुनन्दुनु इच्छलेदनु नर्थमु सूचिम्पबडेनु. वसुनिचये यनु समासमु देहली- दीप न्यायमुग-अनगा इंटिनडवयन्दुंचबडिन दीपमु इरुप्रक्कलनु प्रकाशिकु विधमुन धर्मकाममुलकुनु अन्वयिंचुचुन्नदि. अर्थमुनु संपादिंचुनेडल धर्ममु सेयनगुनु. काममु ननुभविंप नगुनु.) स्वामि : एमियुनु वलदनुचुन्नावु. नायोक्क शासनमु ननुस- रिंचि आचरिंपवच्चुना? कुल : स्वामि! अट्ले सल्पवच्चुनु. मीरु शासनमु मीटि नडचुपक्षमुन नेदैन नडुगवच्चुनु.