मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें40 मुकुन्दमाल चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः, तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तार मव्ययम्. न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा, इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते. अनु भगवद्गीत 4अध्या. 13, 14 श्लोकमु लट्लु शासनमु ननुस रिंचुवारु कान, ना पूर्वकर्मानुरूपमुगनु जरुपवच्चुनु. न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनंजय, उदासीनवदासीन मसक्तं तेषु कर्मसु. अनु भगवद्गीत 9अध्या 9 श्लोकमुन विषमस्सृष्टि चेसिननु दोषमु लेदंटिरि. ना कोरिकलु दीर्घवलयुनंटेरेनि चट्टमुनकु व्यतिरेक मुग नडुव वलसियुंडुटचेत मीरु कोंत श्रम तीसिकोनवलसि युंडुनु. ने नट्लु कोरनु. (ज्ञानुलु इष्टप्राप्ति, अनिष्टनिवारणमु कलगवलयुननि कोररु. सुखमो दुःखमो भगवंतु ड़ीयवलयु ननि युंदुरु. शासनमुंडेनेनि वाडे यिच्चुनु. लेकुन्न अडिगिननु प्रयोजनमुंडदु. कुलशेखरुलुनु अट्ले येमियुनु कोरलेदु.) स्वामि : नी मनोरथमु लीडेर्चुटकु नाकु शक्ति लेदनि येंचि येमि युनु वलदनुचुन्नावा? कुल : हे भगवन्! नन्नु मिगुल पुरोवृद्धिकि देच्चुटकु मीकु शक्ति लेदनि भाविंचि येमियुनु वलदनुचुन्नाननि भाविं पवलदु. नीवु षड्गुण परिपूर्णुडवनि नी नाममे चेप्पक चेप्पचुन्नदि. समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः, ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्. -- गीत. 9.29