भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

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मुकुन्दमाल ५९ आकाशमु लेदनि अनुकोननगुना? पक्षुलु तम तम योग्यता कोलदि येगुर गलवु. इट्टि अगाध मयिन हरिसरस्सुन मुनिगि स्नानमाचरिञ्चेदनु. स्वामि : सरस्सुन जलमुण्डवलदा? कुल : वेदमुलन्दु निरूपिम्पबडिन नी कल्याणगुणमुलनेडु तेरोजल मुन्नदि. दानिनि त्रागेदनु. अटुलु त्रावि आध्यात्मिकाधिभौति काधिदैविकमु लनु तापत्रयमुनु बासेदनु. प्रसादे सर्वदुःखानां हानि रस्योपजायते, प्रसन्नचेतसो ह्याशु बुद्धिः पर्यवतिष्ठति. -- गीत. २.६५ अनुनत्लु आ जलमुनु त्राविन पिम्मट संसारमुनु विडिचि नित्यमुक्तुलोतोड गूडि यानन्दिम्पवलयुनु. स्वामि : अटु लयिन मुनिगि त्रागितिवा? तापमु तीरेना? कुल : आहा! मुनिगितिनि. तापमु तीरिनदि. स्वामि : अटुलयिन लेचिपोम्मु. कुल : श्रम परिहारमैनगदा लेचिपोवुटु? (अनगा तनिवि तीऱले दनि भावमु). 10 सरसिजनयने सशङ्खचक्रे मुरभिदि मा विरम स्वचित्त रन्तुम्, सुखतर मपरं न जातु जाने हरिचरणस्मरणामृतेन तुल्यम्.