भारतकोश
मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)

Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary

कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा

DevanagariHindipublished167 पृष्ठ

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74 मुकुन्दमाल शिवा! नीकु कनकमु समर्पिंत मन्न नी वुंडुनदि कनकगिरि. धनमु नित्तमन्न धनपति यगु कुबेरुडु नी चरणदासुडु. नीवु कोरिनदि यित्तमन्न कल्पवृक्षमु, कामधेनुवु, चिंतामणि मीयिंटि वृक्षमु, मीयिंटियावु, मीयिंटि रायियै युन्नवि. शैत्योपचा- रमु चेयुदमन्न नेल्लवारिनि संतोषिंपजेयु चंद्रुडु नी तललो नुन्नाडु. सकलमु नॊसगुनदि नी चरणमु. इक नीकु कावलसिन देमुन्नदि? भक्तुल मनसु नायंदु चेरुना यनि कोरुचुंदुवु. नन्नु तलचुटके कदा मनसु निच्चिति ननि तलंचुचुंदुवु. अंदुचेत नीकु कावलसिनदि मन स्सोक्कटे अनि विन्नविंचेनु. आ श्लोक मिदि: करस्थे हेमाद्रौ गिरिश निकटस्थे धनपतौ गृहस्थे स्वर्भू जाम॑र सुरभि चिंतामणिगणे, शिरस्थे शीतांशौ चरणयुगलस्थेऽखिलशुभे कमर्थं दास्येऽहं भवतु भवदर्थं मम मनः. भगवद्गीत पंडरेंडव अध्यायमुलो-- ये तु सर्वाणि कर्माणि मयि संन्यस्य मत्पराः, अनन्येनैव योगेन मां ध्यायंत उपासते. तेषा महं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात्, भवामि न चिरा त्पार्थ मय्यावेशित चेतसाम्. अनु 6,7 श्लोकमुलंदु तनकु मनसुनु समर्पिंचि तन्ने गतिग नम्मि युंडिन येडल अट्टिवारिनि मृत्युरूपमैन संसार सागर मुनुंडि दाटिंतु ननि भगवंतुडु चेप्पियुन्नाडु. तंड्रि व्रासि यिच्चिन पत्रमुलो वयसुवच्चिन पुत्रुडुनु चेव्राुल चेयुनट्लु भागवतमुन ब्रह्मदेवुडु “स्वामी! निन्नु नम्मिनवारु संसारसागरमुनु गोवत्सपदजलमट्लु अनगा दूड कालुंचगा पडिन