मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें78 मुकुन्दमाल नादत्ते कस्यचित्पापं न चैव सुकृतं विभुः, अज्ञाने नावृतं ज्ञानं तेन मुह्यन्ति जन्तवः. -- गीत. 5.15 अन्न श्लोकमुलो चेप्पबडिन अज्ञानमु वीडिपोवुनु. ओड समुद्र मुन बागुग निलिचियुण्डेनेनि दानि दाटगलुगुनु. अत्ले पुराण वैराग्यमु काक दृढमयिन भक्तियुण्डेनेनि आ भक्तिये अवश्यमु भवसागरमुनु दाटिञ्चुनु. 14 तृष्णातॊये मदनपवनोद्धूत मोहोर्मिमाले दारावर्ते तनय सहजग्राहसङ्घाकुले च, संसाराख्ये महति जलधौ मज्जतां नस्त्रिधामन् पादाम्भोजे वरद भवतो भक्तिनावं प्रयच्छ. तृष्णातॊये = आशयनेडुनीळ्ळुगलदियु, मदन = मन्मथुडनु, पवन = गालिचेतनु, उद्धूत = पैकिलेपबडिन, मोह = अज्ञानमनु, ऊर्मि = अललयॊक्क, माले = वरुसगलदियु, दारा = भार्ययनु, आवर्ते = सुडु लुगलदियु, तनय = बिड्डलनु, सहज = तोडबुट्टिनवारनु, ग्राह = मॊसळ्ल यॊक्क, सङ्घ = गुम्पुचेतनु, आकुले = कलत पॆट्टबडिनदियुनगु, संसार + आख्ये = संसारमनु पेरुगल, महति = गॊप्प, जलधौ = समु द्रमुनन्दु, मज्जतां = मुनुगुचुन्न, नः = माकु, त्रिधामन् = ओत्रि धामुडा, वरद = ओ वरमुल निच्चुवाडा, भवतः = नीयॊक्क, पाद + अम्भोजे = कमलमुलवंटि पादमुलन्दु, भक्तिनावं = भक्तियनॆडु ओडनु, प्रयच्छ = इम्मु. ओ त्रिधामुडा! वरदा! तृष्णयनु नुदकमुगलदियु, मन्मथु डनु गालिचेत नॆगुर गॊट्टबडिन मोहमुलनॆडि अललवरुसगलदियु,