मुकुन्दमाला स्तोत्रम् (कुलशेखर आलवार - संस्कृत मूल एवं सान्वय हिन्दी व्याख्या)
Mukundamala Stotram of Kulasekhara Alwar with Commentary
कुलशेखर आलवार (राजा कुलशेखर) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंमुकुन्दमाल 77 मुद्रमुनु दाटुट यनु संगति कडुविंतैनदिग उन्नदि. एंतचेप्पिननु नाकेमो नम्मकमु कलुगुकुन्नदि. कुल : मनसा! भयपडकमु. लोतैनदियुनु, दाटशक्यमु कानिदियुनु. नगु संसारसागरमु नेट्लु दातुदु ननि अधैर्यमु चेंदकुमु. मनस्सु : एट्लु भयपडकुंदुनु? एंत चेप्पिननु नाकु भयमु गने युन्नदि. कुल : भगवंतुनियंदु भक्तिमात्रमु सल्पुमु. अतनि यंदु लयंिपुमु. अतनिपादमुलनु विडिचिपेट्टि पाटिपोवलदु. अट्लु चेसितिवेनि या भक्ति संसारसागरमुनु दाटिचिये तीरुनु. मनस्सु : पदियव श्लोकमुलो चेप्पिनट्लु अतनि पादमुललो तप्पक नन्नु चेर्पवलयुननि यत्निंचुचुन्नावु. चलिंपव लदनु चुन्नावु. ना स्वभावमे चंचलमैनदि. आ भगवंतुनियं देमैन विशेषमुंदुना? कुल : तामरपुष्पमु रेकुलवलेनुंडु आ कन्नुलयोक्क अंद मुनु जूचिननु चालुने. मनस्सु : ओहो! वट्टि अंदगाडेना? अटुलैन सामान्यप्रभुवेना? कुल : कादु कादु. चराचर प्रपंचमुनकु ज्ञानाज्ञान मोक्षमु लनु लीलतो नीयगलवाडु. ब्रह्मादुलकु स्वामि. मनस्सु : अन्नियुनु सरिये. मन कतडु सहायमु चेयुना? कुल : अतडु नरकांतकुडु. अतनि शरणु पोंदिन पिम्मट पाप भीतिये युंडदु गदा! भक्ति योक्कटि बागुग नुंडिन चालुनु.